महिला एवं बाल विकास विभाग की अधिकारी ने दिए जरूरी दिशा-निर्देश
- केंद्र के हर बच्चे की व्यक्तिगत रिपोर्ट तैयार करते हुए प्रति तीन माह में करें समीक्षा
- गुमशुदा बच्चों को अभिभावकों तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय समाचार पत्रों में करायें प्रचार
- 18 वर्ष की आयु से अधिक बच्चों की पुर्नस्थापना के साथ छोटे बच्चों को गोद लेने के संदर्भ में दिए निर्देश
- बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, खान-पान आदि सुविधाओं की गंभीरता से पड़ताल की
- तीन दिवसीय निरीक्षण के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग की अधिकारी ने दिए जरूरी दिशा-निर्देश
विभागीय प्रोग्राम मैनेजर अंजलि शर्मा ने अपने तीन दिवसीय सोनीपत के दौरे के दौरान जिला में स्थापित सभी बाल देखभाल केंद्रों का गंभीरता से निरीक्षण किया। उनके तीन दिवसीय सोनीपत के दौरे के दौरान बाल संरक्षण अधिकारी (संस्थानिक) ममता शर्मा व बाल संरक्षण अधिकारी (गैर संस्थानिक) आरती तथा चाइल्ड वैल्फेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य पूनम व रितु भी साथ रही।
प्रोग्राम मैनेजर ने सपना बाल कुंज गोहाना, बाल ग्राम राई, किशोर विकास सदन एटलस रोड सोनीपत, स्पेशल होम सोनीपत, एसओएस सेक्टर-14 और एसओएस सेक्टर-23 का गंभीरता के साथ निरीक्षण किया। उन्होंने सभी केंद्रों में रह रहे बच्चों के लिए दी जा रही सुविधाओं की विशेष रूप से पड़ताल की। खासतौर पर खान-पान, सफाई, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जांच, पेयजल की जांच की। उन्होंने बच्चों को रहन-सहन की व्यवस्थाओं की बारीकी से पड़ताल की।
प्रोग्राम मैनेजर अंजलि शर्मा ने कहा कि केंद्रों में रहने वाले ऐसे बच्चों को वापस घर भेजने की प्रक्रिया शुरु करें जो इसके लिए तैयार हैं। उनके आवास का निरीक्षण करें। सामाजिक कार्यकर्ता इसके लिए सिफारिश दें, जिसमें सीडब्ल्यूसी सदस्य की सहमति अनिवार्य है। उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्रों में रहने वाले सभी बच्चों की व्यक्तिगत देखभाल रिपोर्ट तैयार की जाए और प्रत्येक तीन माह में इसकी समीक्षा की जाए, ताकि बच्चों की जरूरत के अनुसार उन्हें देखभाल प्रदान की जा सके। यदि कोई बच्चा पढ़ाई में कमजोर है तो उसकी शिक्षा पर विशेष फोकस करें। यदि किसी का स्वास्थ्य सही नहीं रहता तो उसे स्वास्थ्य सुविधा दें। उन्होंने निर्देश दिए कि हर केंद्र में बच्चों को समय पर ब्रेकफास्ट, लंच व डिनर दिया जाए। नियमित रूप से उनकी स्वास्थ्य जांच करवायें। हर केंद्र में सुझाव पेटिका लगवायें, ताकि सुधार के लिए बेहतर कोशिशें की जा सकें।
निरीक्षण अधिकारी अंजलि शर्मा ने गुमशुदा बच्चों की रिपोर्ट भी ली। उन्होंने कहा कि लंबे समय से केंद्रों मेंं रह रहे गुमशुदा बच्चों को उनके घर पहुंचाने के लिए भरसक प्रयास किये जायें। इसके लिए राष्ट्रीय समाचार पत्रों में गुमशुदा बच्चों के फोटो सहित विज्ञापन निकलवायें। अधिकाधिक प्रचार करें ताकि ऐसे बच्चों के अभिभावकों को खोजा जा सके। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के बच्चों की पुर्नस्थापना के लिए पुरजोर प्रयास करें। ऐसे बच्चों को हर संभव मदद दी जाए। उन्होंने छोटे बच्चों को गोद दिए जाने के लिए भी सक्रिय प्रयास करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे बच्चों की काउंसलिंगभ्भी की जाए।
इस मौके पर बाल संरक्षण अधिकारी ममता शर्मा व आरती ने बताया कि विभिन्न सीसीआई में लगभग 151 बच्चे रहे रहे हैं। इनमें से करीब 60-70 ऐसे बच्चे हैं जो गुमशुदा के तौर पर केंद्र में भेजे गए। उन्होंने निरीक्षण अधिकारी अंजलि शर्मा को पूर्ण भरोसा दिया कि उनके निर्देशों की ईमानदारी से पूरी अनुपालना की जाएगी। सभी केंद्रों में बच्चों को बेहतरीन सुविधाएं दी जा रही हैं, जिन्हें और सुदृढ़ किया जाएगा। बाल संरक्षण अधिकारी आरती ने कहा कि वे नियमित रूप से स्वयं केंद्रों का निरीक्षण करती हैं। बच्चों की हर प्रकार की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है।
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