-बेरोजगारी में नम्बर वन आ चुके प्रदेश
-50 हजार वार्षिक निजी रोजगार देने की बात तो कही गयी, लेकिन इसके लिए कोई रोडमैप नही
-प्रदेश पर पिछले वर्ष तक 1,98,700 करोड़ का कर्ज हो चुका था
-बजट में ऐसी कोई बड़ी परियोजना के लिए प्रावधान नहीं किया गया
प्रदेश प्रवक्ता
ने कहा कि प्रदेश के आम व्यक्ति से कोसो दूर इस बजट को शिक्षा, स्वस्थ, सुरक्षा व स्वावलंबन पर केंद्रित तो बताया गया। वास्तव में इन चारों क्षेत्रों में
बजट आवंटन जरूरत से बहुत कम किया गया, जिसके परिणाम स्वरूप इन क्षेत्रों में प्रदेश का पिछड़ापन ही जारी रहेगा।
बेरोजगारी में नम्बर वन आ चुके प्रदेश में 50 हजार वार्षिक निजी रोजगार देने की बात तो कही गयी, लेकिन इसके लिए कोई रोडमैप नही दिया गया।
शिक्षा पर बजट
वितरण में वृद्धि तो की गई, लेकिन
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने व मेडिकल और उच्च शिक्षा को गरीब आदमी के दायरे में कैसे
लाया जाए। इस बारे कोई स्पष्टीकरण नही दिया गया। प्रदेश पर पिछले वर्ष तक 1,98,700
करोड़ का कर्ज हो चुका था, जिसके
ब्याज के भुगतान में अधिकतर राजस्व चला जाएगा। जबकि उद्योगिक आधारभूत संरचना में कोई
वृद्धि नहीं की गई। उन्होने बताया कि माइक्रो, छोटे व मझोले उद्योगों के लिए मात्र 330
करोड़ का प्रावधान किया गया, जबकि इस छेत्र का अर्थव्यवस्था में योगदान 60
प्रतिशत से अधिक है।
योजनाकाल दौरान
एक लाख करोड़ के विदेशी निवेश की बात की गई और 5 लाख रोजगार सृजन का तथ्य घोषित हुआ, लेकिन इसके स्रोत बारे कोई सूचना नहीं दी
गयी। किसानों के लिए कोई लाभकारी योजना तो दी नही गयी, उल्टा बजट से पूर्व ही ग्रामीण क्षेत्र की रेजिस्ट्रेशन
स्टांप ड्यूटी महिलाओं के लिए 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत और पुरुषों के लिए 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दी गयी।
गृहणियों के लिए
गैस सिलेंडर 2 माह
में पहले ही लगभग 225 रुपये
बढ़ाया गया। लगातार कर्ज वृद्धि से प्रदेश की वास्तविक आर्थिक स्थिति
का अंदाजा बखूबी लगाया जा सकता है। कुल वसूली का लगभग 29 प्रतिशत सिर्फ ऋण व उसका ब्याज उतारने में चुकता हो रहा
है। जो प्रदेश की काफी गंभीर स्थिति की ओर इशारा करता है। बजट
में सरकार ने दावा किया है कि शिक्षा में गुणवत्ता, बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के
लक्ष्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो कि महज एक दिखावा है। कोई भी मूलभूत संरचना इन उद्देश्यों की प्राप्ति के
लिए बजट में कहीं दिखाई नहीं देती। विकास के लिए सरकारी राजस्व में कोई बजट
उपलब्ध नहीं है, क्योंकि
40 प्रतिशत से अधिक वेतन तथा पेंशन पर
खर्च दिखाया है।
प्रदेश में चालू योजनाओं तथा कर्ज चुकाने के लिए ही बाकी पैसा बचता है। बजट में ऐसी कोई बड़ी परियोजना के लिए प्रावधान नहीं किया गया, जिससे प्रदेश में किसानों, युवाओं तथा बेरोजगारों के लिए राहत का आश्वासन देता हो। परिवहन, भवन तथा सड़कें, जन स्वास्थ्य सेवाएं इत्यादि महत्वपूर्ण विभागों का बजट भी नाकाफी है।
इस प्रकार इस बजट में खोखलापन तथा आंकड़ों की जुगलबंदी ही साबित होती है।
वैसे भी प्रदेश का हर वर्ग सरकार की आर्थिक नीतियों से त्राहि-त्राहि कर
रहा है। ऐसे में प्रदेश के हर नागरिक को भविष्य में कभी न कभी वेंटीलेटर
की आवश्यकता रहेगी। कुल मिलाकर मौजूदा बजट जनता की उम्मीदों पर पानी
फेरने वाला ही बजट है।
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