शिक्षा को देश, प्रदेश व समाज के विकास के लिये अह्म
सरकारी स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ साथ शिक्षा में आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं
अभिभावकों का सरकारी स्कूलों के प्रति और अधिक रूझान बढ़ेगा
उन्होंने कहा कि यह एक अनूठी पहल है, जिसके भविष्य में
सार्थक परिणाम देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि हालांकि शिक्षा विभाग इस दिशा
में अनेक कदम उठा रहा है पर व्यक्तिगत तौर पर वह स्वयं इसी तरह विद्यालयों में
अपना योगदान देगे और साथ ही सभी मंत्रियों, विधायकों व जनप्रतिनिधियों को भी इसके लिये प्रेरित करेंगे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा 127 करोड़ रुपये की लागत से स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम बनाये
जा रहे है।
सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है कि
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे लगभग 8 लाख 6 हजार
विद्यार्थियों को निशुल्क टेबलेट उपलब्ध करवाये जायेंगे। हरियाणा ऐसा पहला प्रदेश
है जहां इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिये टैब्ज उपलब्ध करवाये
जा रहे है।
उन्होंने कहा कि अध्यापकों का समाज में एक विशेष स्थान है और यह समाज व विद्यार्थियों का दायित्व है कि उन्हें पूरा मान और सम्मान दिया जाये। साथ ही उन्होंने कहा कि अध्यापकों का भी समाज के प्रति दायित्व है। वह अध्यापक के कत्र्तव्य को केवल नौकरी न समझकर राष्ट्रीय निर्माण के कार्य के रूप में लें, जिससे और अच्छे परिणाम आयेंगे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में सरकारी स्कूलों के और अच्छे परिणाम आयेंगे, जिससे विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों का सरकारी स्कूलों के प्रति और अधिक रूझान बढ़ेगा।
-विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने घोषणा की कि वह इस वर्ष के स्वैच्छिक कोष की राशि में से एक करोड़ रुपये शिक्षा सुधार पर खर्च करेंगे
गुप्ता ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के स्तर में गुणात्तमक सुधार लाने की दिशा में मुख्यमंत्री मनोहरलाल द्वारा अनेक प्रयास किये जा रहे है। नई-नई योजनायें बनाई जा रही है ताकि बच्चों को शिक्षा के साथ साथ निजी स्कूलों की तर्ज पर सभी सुविधायें उपलब्ध करवाई जा सके। हालांकि उन्होंने कहा कि पंचकूला में सरकारी स्कूल किसी भी प्रकार से निजी स्कूलों से पीछे नहीं है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में सरकारी स्कूलों के परिणाम अच्छे आयेंगे और बच्चों व उनके परिजनों का रूझान सरकारी स्कूलों की तरफ पुनः बढ़ेगा।
उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के लिये सरकारी अधिकारियों व जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को स्वयं पहल करते हुए अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में शिक्षा दिलवानी चाहिए। इससे दूसरे लोगों को भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में शिक्षा दिलवाने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने के लिये स्टार्टअपस को आगे लाना जरूरी है। उन्होंने शिक्षा मंत्री से आह्वान किया कि शिक्षा क्षेत्र में लागू होने वाले प्रोजैक्टस में 20 प्रतिशत काम स्टार्टअपस के लिये आरक्षित किया जाना चाहिए, जिससे युवाओं को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।
इस अवसर पर नगर निगम महापौर कुलभूषण गोयल, एलीमेंट्री एजुकेशन विभाग के महानिदेशक नितिन यादव, विभाग के संयुक्त निदेशक विजय सिंह यादव, जिला शिक्षा अधिकारी उर्मिल देवी, जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी निरूपमा कृष्ण, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सेक्टर-6 के प्रिंसीपल रजनीश सचदेवा सहित संबंधित स्कूलों के प्रिंसीपल, पार्षद सुरेश वर्मा, नरेंद्र लुबाना, हरेंद्र मलिक, डीपी सिंगल, डीपी सोनी व शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
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