Bharatiya Kisan Sangh..
केंद्र सरकार द्वारा धान के मूल्य में की बढ़तोरी को लेकर हल्के के लोगों में नाराजगी, सरकार को फसलों का मूल्य निर्धारित करने से पहले किसान संगठनों की राय लेनी चाहिए.
भारतीय किसान संघ की ओर से वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष रतन सिंह
देवधर व प्रदेश मंत्री रामबीर सिंह चौहान ने कहा कि सरकार को फसलों का मूल्य
निर्धारित करने से पहले किसान संगठनों की राय लेनी चाहिए। सरकार मूल्य निर्धारण से
पूर्व किसान संगठनो की राय नहीं लेती यहीं कारण है कि किसानो के मुताबिक रेट
निर्धारित नहीं हो पाते। सरकार की ओर से जारी समर्थन मूल्य को देखकर यह अंदाजा
लगता है कि जो संस्था मूल्य वृद्धि पर विचार करती है वह जमीन से जुड़ी हुई नहीं
है। ए.सी कमरों में बैठकर योजना बनाने से किसानों को नुकसान होता है। धान की फसल
मे केवल 25 रूपएं की बढ़ोतरी कर सरकार ने धान उगाने वाले किसानों के साथ
घोर अन्याय किया है। आज डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं और कृषि में उपयोग होने वाली
खाद, दवाइयां भी महंगी हो रही हैं। पिछले वर्षों के मुकाबले लेबर
खर्च भी बढ़ गया है।
जिसको देखते हुए सरकार को धान का मूल्य 2500 रूपएं प्रति क्विंटल करना चाहिएं। तभी किसान खुशहाल होगा और
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 2022 तक किसानों की आय दोगुना
करने का वायदा भी पूरा होगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि धान के भाव पर
पुनर्विचार करके इसमें बढ़ोतरी कर किसानों को लाभ पहुंचाया जाएं। अगर ऐसा नहीं हुआ
तो भारतीय किसान संघ इसके खिलाफ आंदोलन करेगा।
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