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Yamunanagar ; IMA के आवहान पर जिले में सुबह 8 से 2 बजे तक बंद रही OPD सेवाएं

IMA के आवहान पर जिले में सुबह 8 से 2 बजे तक बंद रही OPD सेवाएं 



       REPORT BY : RAHUL SAHAJWANI      

CITY LIFE HARYANA | यमुनानगर : आई एम ए जगाधरी यमुनानगर ने आज आई एम ए नेशनल हेड क्वार्टर के आह्वान पर राष्ट्रीय विरोध दिवस का आयोजन किया। जिसका उद्देश्य "पेशे और पेशेवरों पर हमले को रोकना" जिसका नारा है "सेव द सेवियर्स" 


सुबह 8 से 2 बजे तक बंद रखी गई OPD सेवाएं 

सिटी लाइफ हरियाणा की टीम के साथ खास बातचीत में एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉक्टर सोनी ने बताया की हाल ही में हम असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, यूपी, कर्नाटक और कई अन्य स्थानों पर पिछले दो हफ्तों में कोविड ड्यूटी पर डॉक्टरों पर हिंसा की श्रृंखला को देखकर दुखी हैं। डॉक्टरों को कई फ्रैक्चर और गंभीर चोटें लगी हैं और महिला डॉक्टरों को भी हिंसक मौखिक और शारीरिक हमलों का सामना करना पड़ रहा है। हर दिन ऐसा हो रहा है। हमने इन दुखद कृत्यों को प्रधान मंत्री, गृह मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के ध्यान में लाने की पूरी कोशिश की है, लेकिन बहुत राहत नहीं मिली है। 



एसोसिएशन की मांगे 

1. केंद्रीय अस्पताल और स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर संरक्षण अधिनियम आईपीसी और सीआरपीसी टैग के साथ

2. प्रत्येक अस्पताल में मानकीकरण और सुरक्षा में वृद्धि।

3. अस्पताल को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाएगा।

4. मारपीट के दोषियों को फास्ट ट्रैक मोड के तहत दंडित किया जाएगा और कड़ी सजा दी जाएगी।

कोरोना काल में आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के डॉक्टरों द्वारा देश एवं समाज की सेवा में अभूतपूर्व योगदान रहा है और इस दौरान पंद्रह सौ से ज्यादा डॉक्टरों ने मरीजों की सेवा में अपने प्राणों का त्याग भी किया है डॉक्टरों पर होने वाले हमले ना केवल डॉक्टरों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव डालते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को चिकित्सा व्यवसाय चुनने पर एक नकारात्मक प्रभाव डालते हैं यदि डॉक्टरों पर इसी प्रकार हमले होते रहे तो हमारी आने वाली पीढ़ियां कदापि इस व्यवसाय को नहीं अपनाएंगे और चिकित्सा कर्मी भी गंभीर मरीजों का इलाज करने में अपने आप को मानसिक रूप से तैयार नहीं कर पाएंगे इस सब का खामियाजा केवल और केवल गंभीर मरीजों को ही उठाना पड़ेगा ।

डॉक्टर या हस्पताल के कर्मचारी के साथ मारपीट  करना कानूनी जुर्म है तथा इस से दूसरे दाखिल मरीजों की जान भी जोखिम में पड़ जाती है । यदि लगता है कि डॉक्टर की गलती है तो कानून और बहुत उपाय हैं। कोई भी डॉक्टर जान बूझ कर कभी भी मरीज़ को नुकसान नहीं पहुंचाता । आप सभी से भी अनुरोध है कि इस विषय पर लोगों को जागरूक करें कि डॉक्टरों के साथ मारपीट न करें I

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