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Kurukshetra- झूठा केस दर्ज कराने वाले को हो सकती है सजा : हिमांशु गर्ग

Legal steps to take if a false FIR is filed against you
झूठी शिकायत देने पर वर्ष 2021 में 42 लोगों के खिलाफ की गई कारवाई


  • झूठी शिकायतों का बढ़ रहा ग्राफ 
  • झूठी शिकायत देने पर 42 लोगों के खिलाफ की कारवाई 
  • भारतीय दण्ड की धारा 182 में है सजा का प्रावधान  
  • 7 साल की सजा का है प्रावधान

कुरुक्षेत्र। अक्सर कुछ लोग बेवजह ही शिकायत करने के शौकिन होते हैं। उनका यह शौक उनको सलाखों के पीछे भिजवा सकता है। इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक कुरुक्षेत्र हिमांशु गर्ग ने बताया कि कुछ लोग किसी से रंजिश के कारण झूठी शिकायत देकर उसको फंसाने का काम करते हैं।

  • The First Information Report (FIR) is lodged in Criminal cases under Sec 154(1)(X) of Crpc before the police. The FIR can be lodged only in case of Cognizable Offences defined in Sec 2(c) of Crpc and not for Non-cognizable offences. Schedule I of Crpc contains the list of Cognizable offences for which FIR can be lodged. There are various Instances where False FIR is lodged against a person in order to harass him or to falsely implicate him in a false case. Therefore, this Article explains the action which the victim of such False FIR can take against the person who has lodged such False FIR.

यह जानते हुए कि उनके द्वारा दी गई शिकायत झूठी है फिर भी रंजिश के कारण किसी को क्षति या मानसिक पीडा पंहुचाने की नियत से शिकायत दर्ज करवा देते है। जिस शिकायत पर पुलिस अधिकारी/कर्मचारी तुरन्त प्रभाव से आवश्यक कार्यवाही शुरु कर देते हैं। लेकिन बाद में पता चलता है कि जिस व्यक्ति ने यह सूचना दी थी वह सही नहीं थी। झूठी शिकायत दिये जाने पर जहां आरोपी बनाए जाने वाले व्यक्ति को मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। 

वहीं, उसकी सामाजिक बदनामी भी होती है। साथ ही मामले की जांच करने में पुलिस का महत्पवूर्ण समय भी बर्बाद होता है। जिस कारण कई बार अति महत्वपूर्ण मामले की जांच भी समय पर पूरी नहीं हो पाती। इस प्रकार की झूठी सूचना देना भी एक दण्डनीय अपराध है। इस तरह के व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जा सकती है। इस तरह के व्यक्ति मानसिक तौर पर ठीक नहीं होते हैं तथा पुलिस तथा प्रशासन का समय बर्बाद करने व झूठी शिकायत देकर खुद के खिलाफ ही कार्यवाही करवा बैठते हैं। पुलिस तथा प्रशासन का समय बर्बाद करने व कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए आमजन से अपील है कि बेवजह झूठी शिकायत न दें।

झूठी शिकायत देने पर वर्ष 2021 में 42 लोगों के खिलाफ की गई कारवाई

  • जानकारी देते हुए पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि जिला कुरुक्षेत्र में वर्ष 2021 में ( 20 जून तक ) 42 लोगो के खिलाफ झूठी शिकायत देने पर आईपीसी की धारा 182 के तहत कारवाई की गई है। प्रवक्ता ने बताया कि सबसे ज्यादा महिला थाना व केयूके पुलिस द्वारा झूठी शिकायत देने वालों के खिलाफ कार्यवाही की गई है। इन दोनों थानों द्वारा 11/11, थाना शहर पेहवा 6 , थाना कृष्णा गेट , बाबैन व इस्माईलाबाद द्वारा 3/3 थाना लाडवा 2 तथा थाना शहर थानेसर , शाहाबाद व सदर पेहवा द्वारा 1/1 झूठी शिकायत देने वालों के खिलाफ मामले दर्ज किये गए हैं।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 182 में है सजा का प्रावधान

जिला पुलिस के सहायक जिला न्यायावादी विकास गुलिया ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 182 में झूठी शिकायत देने पर 6 माह की सजा, कारवास या एक हजार रुपए जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जा सकता है। 

परेशानी बढ़ने के कारण पुलिस नहीं करती है पैरवी

सुरेश बंचल, एडवोकेट


वहीं, एडवोकेट सुरेश बंचल का कहना है कि पुलिस द्वारा धारा 182 के तहत झूठे केस दर्ज कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। नियम हैं कि कोर्ट में सीधे तौर पर इस धारा के तहत खुद शिकायतकर्ता बनकर पैरवी करनी पड़ती है। बार बार कोर्ट का चक्कर काटना पड़ता है। पुलिस के अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों में पैरवी करने से उनकी परेशानी बढ़ जाती है। पहले से ही दर्ज एफआइआर में जांच आदि का काम ठीक समय पर पूरा करने में दिक्कत होती है। अब अगर ऐसे मामलों की भी पैरवी शुरू कर दी गई तो पुलिस के समय का नुकसान होगा। इसी कारण झूठे मामलों को बंद कर उनके खिलाफ पुलिस की ओर से कोई मामला दर्ज नहीं किया जा जाता है।

7 साल की सजा का है प्रावधान

एडवोकेट सुरेश बंचल ने बताया कि धारा 182 के तहत सरकारी कर्मचारी को झूठी सूचना या जानकारी देने पर सजा का प्रावधान है। केस की जांच में साबित हो जाता है कि शिकायतकर्ता द्वारा झूठी शिकायत दी गई तो धारा 182 के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई होती है। इसमें 6 महीने की सजा और जुर्माना भी है। जबकि धारा 211 के तहत कोर्ट में झूठी गवाही या गुमराह करने पर उसके खिलाफ कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई होती है। जिसकी सजा 7 साल से अधिक है। 



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