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𝐂𝐡𝐚𝐧𝐝𝐢𝐠𝐚𝐫𝐡 𝐍𝐞𝐰𝐬 : विधानसभा स्पीकर बोले, हरियाणा में नायब सरकार अल्पमत में नहीं

कांग्रेस की तरफ से दावा किया जा रहा है कि निर्दलीय विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन दे दिया है जिसके बाद प्रदेश की नायब सरकार अल्पमत में आ गई है !


विधानसभा में भाजपा के पास 40 विधायक, 30 कांग्रेस, 10 जेजेपी, 6 निर्दलीय, 1 लोहपा और 1 विधायक आईएनएलडी का शामिल था।



चंडीगढ़, डिजिटल डेक्स।।  हरियाणा में तीन निर्दलीय विधायकों द्वारा बीजेपी सरकार से समर्थन वापस लिए जाने के दावों के बीच मानो प्रदेश की राजनीति में भूचाल सा आ गया है।

विधान सभा अध्यक्ष ने कहा विधानसभा सदन में फ्लोर टेस्ट के बाद होगा फैसला। अभी हरियाणा में नायब सरकार अल्पमत में नहीं बोले ज्ञान चंद गुप्ता।

हरियाणा में तीन निर्दलीय विधायकों द्वारा बीजेपी सरकार से समर्थन वापस लिए जाने के दावों के बीच मानो प्रदेश की राजनीति में भूचाल सा आ गया है।


कांग्रेस की तरफ से दावा किया जा रहा है कि निर्दलीय विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन दे दिया है जिसके बाद प्रदेश की नायब सरकार अल्पमत में आ गई है।

इस पर विधान सभा स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन वापस लेने की सूचना विधान सभा के पास फिलहाल नहीं है।

सरकार अल्पमत में हो या बहुमत में इसका निर्णय विधान सभा सदन में होता है।

हालांकि अल्पमत पर निर्णय राज्यपाल की तरफ से लिया जाता है अभी तक विधान सभा को राज्यपाल की तरफ से भी कोई सूचना नहीं मिली है।

विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने बताया कि सदन में संख्या बल पर अविश्वास प्रस्ताव निर्भर करता जो विधानसभा में नहीं आया है।

उन्होंने कहा कि बीती 12 मार्च को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का फ्लोर टेस्ट हुआ था, जिसमें कांग्रेस विधायकों और आईएनएलडी विधायक को छोड़ कर सभी विधायकों ने बीजेपी को समर्थन दिया।

तब विधानसभा में भाजपा के पास 40 विधायक, 30 कांग्रेस, 10 जेजेपी, 6 निर्दलीय, 1 लोहपा और 1 विधायक आईएनएलडी का शामिल था।

तब नायब सिंह सैनी को बीजेपी, जेजपी और निर्दलीय विधायकों के साथ अपना बहुमत साबित किया था।

सरकार में इन पार्टियों का समर्थन अभी तक बना हुआ है।

विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने विधानसभा की परंपरा के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी सरकार में बहुमत सिद्ध किए जाने के छह महीने के भीतर दोबारा फ्लोर टेस्ट नहीं होता है।

तीन निर्दलीय विधायकों के मामले में यदि राज्यपाल विधायकों का समर्थक लेने के बारे कोई निर्णय लेते हैं तो इसके बाद सरकार के दावेदार को विधान सभा सदन में अल्पमत या बहुमत होने की जानकारी देनी होती है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में 88 विधायक हैं और भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है।

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