सांसद ने करनाल के कैमला गांव में हुई घटना की निंदा
सांसद नायब सिंह सैनी सैक्टर 3 निवास कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, यहीं लोकतंत्र की खुबसूरती है। केन्द्र सरकार ने जिस कानून को बनाया है, यह 2001 से बनना शुरु हुआ था, परंतु 19 साल से कोई भी सरकार इस पर लागू करने की हिम्मत नहीं कर सकी। इन बिलों का विरोध केवल ऐसे लोग कर रहे है, जिनका कोई औचित्य नहीं है।
यह कृषि बिल किसान हितैषी बिल है, कुछ लोग इन बिलों को लेकर राजनीति कर रहे है, ऐसे लोगों से सचेत रहने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने ऐसे कानून बनाए कि किसान देश की किसी भी मंडी में अपनी फसल बेच सकता है, इन कानूनों के लागू होने से पहले कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सैमिनार आयोजित किए गए, रिसर्च की गई तथा बुद्घिजीवियों की राय ली गई तब जाकर यह कृषि कानून बनाए गए है।
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने अपने 6 सालों के कार्यकाल में किसानों की आय को बढ़ाने तथा आर्थिक मजबुती प्रदान करने के लिए अनेकों योजनाओं को अमलीजामा पहनाया। सरकार ने अब किसानों को आर्थिक मजबुती देने और फसलों को किसी भी मंडी में बेचने की आजादी देने के लिए देश के किसान संगठनों के अनुरोध पर ही कृषि कानूनों को तैयार किया है। इन कृषि कानूनों से किसानों की आय में ओर इजाफा होगा तथा आर्थिक रुप से मजबुती मिलेगी।
अहम पहलु यह है कि इस देश में जब विपक्षी दलों की जमीन खिसकती नजर आई तो किसानों के कंधों पर बंदूख रखकर निशाना साधने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2014 से लगातार किसान की आय को वर्ष 2022 तक दौगुना करने के लिए कार्य किए है और आय बढ़ाने के लिए एमएसपी में ढेड़ गुण बढौतरी करने का काम किया है। इस सरकार ने एमएसपी के रुप में धान की फसल के लिए 5 लाख करोड़ तथा गेंहू की फसल के लिए 3 लाख करोड़ रुपए की राशि का भुगतान किया है। केन्द्र सरकार ने के्रडिट कार्ड योजना बढ़ाने, मृदा जांच के लिए अलग योजना बनाकर दवाई, खाद के खर्चों को कम किया ताकि किसान की आमदन बढ़ सके।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 6 हजार रुपए, पीएम फसल बीमा योजना के जरिए किसानों को जोखिम फ्री करने, कृषि यंत्रों पर भारी सबसीडी देने, खाद के लिए लगने वाली लाईनों से निजात दिलाकर नीम कोटिड यूरिया उपलब्ध करवाने, पीएम सिंचाई योजना के तहत ड्रिप और टपका सिंचाई के लिए सबसीडी देने, हर वर्ष एमएसपी बढ़ाकर किसानों को मजबुत करने का काम किया है। सरकार की सोच है कि किसान की आय बढ़े ताकि किसान खुशहाल और मजबुत बन सके।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बाजरा, कपास, सरसों, सूरजमुखी व दलहन फसलों की एमएसपी पर खरीद की है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए केन्द्र सरकार ने जहां फसली ऋण को 18 प्रतिशत से कम करके 12 प्रतिशत फिर 9 प्रतिशत और फिर से 7 प्रतिशत किया। लेकिन विपक्ष की सरकार ने इस विषय पर जरा सा भी ध्यान नहीं दिया। इतना ही नहीं हरियाणा में अब मुख्यमंत्री मनोहर लाल की नेतृत्व वाली सरकार ने फसली ऋण को जीरो प्रतिशत करने का काम किया और केन्द्र सरकार ने फसली ऋण को 4 प्रतिशत करने का काम किया है। केन्द्र और राज्य सरकार 24 घंटे किसानों की समस्या सुनने और उनकी समस्या का समाधान करने का काम कर रही है और निरंतर करती रहेगी। इस मौके पर जिला महामंत्री सुशील राणा, ओबीसी मोर्चा के प्रदेश कार्यकारणी सदस्य हरमेश सैनी, कैलाश सैनी सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
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