5 सालों में लगभग 59000 करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च की जाएगी
केन्द्रीय मंत्री रतनलाल कटारिया ने बातचीत करते हुए इस छात्रवृत्ति योजना को लेकर राज्यों के साथ फंडिंग पैटर्न के विवाद को भी सुलझा लिया गया है, नए फंडिंग पैटर्न के तहत केंद्र की हिस्सेदारी 60 फीसद फीसदी और राज्यों को 40 फीसदी हिस्सा देना होगा। पुराने फंडिंग पैटर्न से अब तक इस स्कीम में हर साल औसतन 1100 करोड रुपए की ही मदद दी जाती थी लेकिन अब नई फंडिंग पैटर्न के हिसाब से यह बढक़र लगभग 6 हजार करोड़ रुपए हो जाएगी, यानी अनूसूचित वर्ग के बच्चों के कल्याण की स्कीम पर खर्च की जाने वाली राशि में 5 गुणों से ज्यादा की बढ़ोतरी होगी। इस संचालित योजना पर अगले 5 सालों में लगभग 59000 करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च की जाएगी जिसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 35000 करोड़ से ज्यादा की होगी।
उन्होंने कहा कि इस योजना से अनुसूचित जाति वर्ग के लगभग 4 करोड़ से ज्यादा विद्यार्थियों को लाभ मिल सकेगा। केन्द्र सरकार द्वारा पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना पर लिए गए फैसले से अनुसूचित जाति के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं एवं दलित संगठनों से अपील कि वे इस योजना के बारे में दलित समाज के बीच में जनसंपर्क अभियान चलाएं ताकि लोगों में अधिक से अधिक जागरूकता फैल सके।
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