ग्रामीण बोले-अधिकारी कर रहे है खानापूर्ति, जब बांध बनता है तब अधिकारियो को होती है जानकारी
BY: Ravinder Saini
City Life Haryana। रादौर : यमुनानदी की प्राकृतिक धारा को बाधित कर खनन करने का सिलसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा है। खनन एजेंसी संचालक बार बार इस नियम को तोडक़र यमुनानदी की प्राकृतिक धारा को मोड़ रहे है और खनन कार्य को अंजाम दे रहे है। ऐसा नहीं है कि मामला शासन व प्रशासन की नजर से दूर है।
लेकिन समस्या ये है कि प्रशासन की कार्रवाई केवल मामला दर्ज करवाने तक की सीमित है। ऐसा न हो इस पर प्रशासन के अधिकारियो का कोई ध्यान नहीं है। जबकि संबंधित विभाग की ओर से घाटो पर निगरानी रखने के लिए अलग अलग अधिकारियो को जिम्मा सौंपा गया है। लेकिन फिर भी नियमो टूट रहे है और नियम टूटने के बाद अधिकारी केवल पुलिस को शिकायत देकर अपनी जिमेंवारी से पल्ला झाड़ रहे है। ऐसा ही गत दिनो भी सामने आया है। जिसमें सिंचाई विभाग को खनन एजेंसी बी-12 द्वारा नियम तोडऩे की सूचना मिली। सूचना पर एसडीओ जसविन्द्र सिंह हुड्डा मौके पर निरीक्षण करने पहुंचे और पुलिस को शिकायत दी। जिसके बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया।
- यह दी शिकायत..
जठलाना पुलिस को दी शिकायत में एसडीओ जसविंद्र हुड्डा ने बताया
कि उन्हें सूचना मिली थी कि खनन घाट बी -12 के संचालक यमुनानदी
में बांध बनाकर खनन कार्य कर रहे है। सूचना पाकर वह मौके पर पहुंचे तो उन्होने
देखा कि उन्हें मिली सूचना सही है। खनन एजेंसी संचालक यमुना नदी के अंदर बांध बना
यमुना नदी के प्राकृतिक धारा को मोड़ हुए है और उसके बाद खनन कर रहा है। ऐसा नियमो
के विपरीत है। इसलिए इसकी शिकायत एसडीओ ने पुलिस को दी और पुलिस ने एजेंसी संचालक
के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
- एक दिन में नहीं बनता बांध, लगते है कई दिन, फिर भी अधिकारी रहते है अंजान..
ग्रामीण शिवकुमार, अमीचंद, शुभम, पुष्पेन्द्र इत्यादि का कहना है कि इस प्रकार मामला दर्ज करवाकर अधिकारी केवल खानापूर्ति करने का कार्य करते है। नियम सख्त है। अधिकारियो को नियमो की जानकारी भी है। लेकिन फिर भी अधिकारी इसमें ढील बरतते है। अधिकारी चाहे तो इस प्रकार के कार्यो को होने से पहले ही रोका जा सकता है क्योंकि बांध बनाने का कार्य एक दिन में नहीं हो जाता। इसे बनाने में कई दिन लगते है। इतने दिनो में यह अधिकारी भी निरीक्षण पर आते रहते है। लेकिन वह सच्चाई को क्यों नहीं देख पाते यह चिंता का विषय है।
क्योंकि वह केवल अपनी जिमेंवारी से पल्ला
झाड़ रहे है। जब अधिकारियो को पता है कि यह कार्य नहीं हो सकता तो इसे रोकने के
लिए पहले से भी प्रबंध क्यों नहीं किए जाते। जबकि विभाग ने सभी घाटो पर अलग अलग
अधिकारियो की जिमेंवारी लगाई हुई है। फिर भी अगर नियम टूट रहे है तो यह कहीं न कही
अधिकारियो की मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है। बाद में अधिकारी केवल खानापूर्ति के
लिए कभी कभार इस प्रकार की शिकायत देकर कागजी कार्रवाई पूरी कर लेते है।
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