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रादौर - खनन क्षेत्र में लगातार टूट रहे नियम बन रहे यमुनानदी की पहचान, अधिकारी नहीं कर रहे कार्रवाई, फोन उठाना भी नहीं समझते मुनासिफ

नगली घाट पर प्राकृतिक धारा से हो रही छेड़छाड़ तो वहीं निर्माणाधीन ओवरब्रिज के पास ही नियमो के विपरीत हो रहा खनन

BY: Ravinder Saini 


City Life Haryanaरादौर :  आमतौर पर पावन पवित्र यमुनानदी अपने धार्मिक व जीवनदायी महत्व को लेकर जानी जाती है। लेकिन जठलाना व गुमथला क्षेत्र में यह यमुनानदी अब यहां खनन जोन में टूट रहे नियमो के कारण अधिक  प्रसिद्धि प्राप्त करती जा रही है। ऐसा तब हो रहा है जब खनन को लेकर सख्त नियम है और नियम न टूटे इसके लिए अलग अलग घाट पर अलग अलग अधिकारियो की जिमेंवारी लगाई गई है। लेकिन फिर भी नियम तोड़ रही खनन एजेंसियों के हौंसले इतने बुलंद है कि सभी नियम ताक पर रखकर खनन किया जा रहा है और अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित है।

हालत अब यह है कि यमुनानदी में न केवल प्राकृतिक धारा से छेडछाड़ हो रही है वहीं करोड़ो रूपए की लागत से उत्तर प्रदेश व हरियाणा को जोडऩे के लिए नगली घाट पर तैयार हो रहे ओवरब्रिज के पास भी खनन प्रक्रिया जारी है। जबकि नियमानुसार ओवरब्रिज के पास एक निश्चित दूरी तक खनन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। फिर भी यहां ऐसा धड्डल्ले से किया जा रहा है। जिसको लेकर प्रशासनिक कार्रवाई पर हर बार की तरह इस बार एक प्रश्रचिह्नं लगा हुआ है।

-नियम ताक पर रखकर यमुनानदी में प्राकृतिक धारा को अवरूद्ध कर किया जा रहा है खनन


सिंचाई विभाग के नियमो के अनुसार यमुनानदी की प्राकृतिक धारा के साथ छेडछाड़ नहीं की जा सकती। खनन करने वाली एजेसिंयो को भी साफ हिदायत है कि खनन करने के लिए वह प्राकृतिक धारा को अवरूद्ध न करे। लेकिन खनन घाट बी-15 पर इन नियमो की खुलेआम अनदेखी हो रही है। नियमो को ताक पर रखकर खनन एजेंसी द्वारा यमुनानदी की प्राकृतिक धारा को अवरूद्ध किया गया है और बांध बनाकर लगातार नदी में खनन प्रक्रिया जारी है। ऐसा रात में अंधेरे में नहीं बल्कि दिन के उजाले में धडल्ले से हो रहा है। लेकिन किसी भी अधिकारी को यह दिखाई नहीं दे रहा है।

-ओवरब्रिज के लिए भी घातक है टूट रहे नियम


नगली घाट पर सरकार की ओर से करीब 104 करोड़ रूपए की लागत से ओवरब्रिज का कार्य करवाया जा रहा है। यह ब्रिज हरियाणा को उत्तरप्रदेश की सीमा से जोड़ेगा। ओवरब्रिज का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि सैंकड़ो किसानो की भूमि यमुनानदी पार है। वहां पहुंचने में उन किसानो को अपनी जान का जोखिम उठाना पड़ता है लेकिन ओवरब्रिज बनने से उन्हें राहत मिलेगी। लेकिन इस ओवरब्रिज के के तैयार होने से पहले ही इसे नुकसान पहुंचाए जाने की नींव तैयार हो रही है। जिसके पीछे भी खनन एजेसिंयो का मनमाना रवैया व अधिकारियो अनदेखी शामिल है। नियम के अनुसार ओवरब्रिज के दोनो और करीब करीब 1 किलोमीटर तक खनन नहीं किया जा सकता। लेकिन केवल मात्र 1०० मीटर की दूरी पर खनन एजेंसी लगातार खनन कर रही है। लेकिन न तो सिंचाई विभाग के अधिकारियो और न ही खनन व ओवरब्रिज का निर्माण करवा रहे पीडब्लयूडी विभाग के अधिकारियो की इस पर कोई नजर पड़ रही है।

-न लिखित शिकायत पर होती कार्रवाई और न ही अधिकारी उठाते है फोन


क्षेत्रवासी बलविन्द्र सिंह, मनोज, सतनाम, पंकज इत्यादि का कहना है कि यमुनानदी में लगातार नियम टूट रहे है। क्षेत्र के ग्रामीण लगातार इसकी शिकायत पर भी अधिकारियो से कर रहे है। लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। लिखित में शिकायत होने पर उस पर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जाती है और जब फोन के माध्यम से ग्रामीण अधिकारियों पर शिकायत करना चाहते है तो अधिकारी फोन उठाना ही मुनासिफ नहीं समझते। अगर किसी शिकायत पर अधिकारी मौके पर आ भी जाए तो पहले इसकी सूचना संबंधित ठेकेदार को दी जाती है। जब तक अधिकारी मौके पर आते है संबंधित ठेकेदार अपने कुछ चेहते लोगो को मौके पर बुलाकर अधिकारियो के सामने उसकी शिकायत को दबाने या फिर झूठा साबित करवाने की पटकथा तैयार कर लेते है।

-संडे मनाने में व्यस्त रहे अधिकारी


मीडिया की टीम ने जब नगली घाट का दौरा किया तो वहां न केवल प्राकृतिक धारा को अवरूद्ध बांध तैयार किया गया था। साथ ही तैयार हो रहे ओवरब्रिज से कुछ ही दूरी पर खनन किया जा रहा था। इसको लेकर जब सिंचाई विभाग व पीडब्लयूडी विभाग के अधिकारियो का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो बार बार फोन करने पर भी पीडब्लयूडी विभाग के एक्सईन राजकुमार व सिंचाई विभाग के एसडीओ अतेन्द्र पाल ने फोन उठाने की जहमत नहीं उठाई। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि फोन न उठाने का ग्रामीणो का आरोप उचित है और अधिकारियो की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है।

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