आज पुलवामा हमले की दूसरी बरसी है
इस अवसर पर इंकलाब मंदिर संस्थापक अधिवक्ता वरयाम सिंह ने कहा
कि दो वर्ष पहले आज ही के दिन देश के पुलवामा में सैनिको पर एक बड़ा आतंकवादी हमला
हुआ था। जिसमें काफी सैनिक शहीद हो गए थे। वहीं आज ही के दिन 1931 में अंग्रेजी हकुमत
की ओर से शहीद भगतसिंह, राजगुरू व सुखदेव को फांसी की सजा दिए जाने का
ऐलान किया गया था। यह दिन देश के इतिहास में काले दिवस के समान है। लेकिन देश के
कुछ युवा आज के दिन को पश्चिमी सभ्यता के अनुसार प्यार के दिन के रूप में मनाते
है। जो कि उचित नहीं है।
जिस दिन देश के वीरो को फांसी की सजा सुनाई गई हो और दर्जनो
सैनिक शहीद हुए तो तो वह दिन हमारे लिए उत्साह का कैसे हो सकता है। इसलिए हमें आज
के लिए शहीदो को याद करना चाहिए क्योंकि उन्हीं की बदौलत आज हम खुली हवा में सांस
ले रहे है। उन्होंने कहा कि हमें शहीदों की शहादत, कुर्बानी व त्याग को कभी नहीं भुलना चाहिए।
मौके पर सर्वजीत सिंह, अवतार सिंह, दीपक गर्ग, संतूराम, गुरूनुर, गुरूमुख सिंह, अमित, सोनू, कुलवंत, गुरमेल व मोनू इत्यादि मौजूद थे।
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