Hooda said the government has suddenly stopped procuring wheat and it has caused distress to the farmers. “The government should tell that what will the farmers do, whose wheat is not sold yet? In the last lockdown, farmers were allowed to come to the mandi and the government should continue to procure wheat in the mandi this time too. This will also enable the Corona Guidelines to be followed and farmers will not face any problem. This will allow the farmers to sell his wheat crop and prepare for the next crop. But the government has not yet paid the farmers for the purchases made so far and a payment of Rs 7,000 crore remains outstanding. The government should pay the farmers in full, including the interest, as promised,” the former Chief Minister said.
जबकि, सरकार की तरफ ने डीएपी के बढ़े हुए दाम वापस लेने की बात कही थी। लेकिन सरकार
के दावे के बावजूद किसानों को अप्रैल महीने में 1600 रुपये और मई में 1900 रुपये प्रति बैग के हिसाब से भुगतान करना पड़ रहा है।
सरकार को डीएपी के दाम को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और बढ़े हुए दामों को
वापिस लेना चाहिए।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि सरकार ने अचानक गेहूं की खरीद बंद करके किसान पर एक और मार मारने का काम किया है। सरकार को बताना चाहिए कि जिन किसानों का गेहूं अब तक नहीं बिका है, वो क्या करें? हुड्डा ने कहा कि जिस तरह पिछली बार लॉकडाउन में किसानों को मंडी में आने की छूट दी गई थी। उसी तरह इस बार भी व्यवस्था बनाकर सरकार को मंडी में गेहूं की खरीद जारी रखनी चाहिए। इससे कोरोना गाइडलाइंस की भी पालना हो सकेगी और किसानों को भी दिक्कत पेश नहीं आएगी। इसके अलावा, अन्नदाता को अपना गेहूं बेचकर अगली फसल की तैयारी करनी है। लेकिन सरकार ने अब तक पिछली खरीद का भी पूरा भुगतान नहीं किया। अब भी करीब 7 हजार करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। सरकार को अपने वादे के मुताबिक ब्याज समेत किसानों को पूरा भुगतान करना चाहिए।
हुड्डा ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है
कि वो किसानों को उसकी सब्जी और फसलों का उचित रेट भावांतर के तहत दे। लेकिन लगता
है कि सरकार का सारा ध्यान खाद, बीज, पेट्रोल-डीजल और कृषि
उपकरणों के दाम बढ़ाकर खेती की लागत में इजाफा करने पर ही लगा है।
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