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Sonipat- सौतेली माता ने बेटे को बिठाया गलत बस में तो नेपाल से पहुंचा हिंदुस्तान : आरती

Child Protection Officer-

बाल संरक्षण अधिकारी आरती ने दूसरे देश के बालक के अभिभावकों को भी अथक प्रयासों से खोज निकाला, लॉकडाउन में भी बाल संरक्षण अधिकारी के समर्पित प्रयास व परिश्रम ने दो बालकों के जीवन को दी नई आशाएं, शिमला से पहुंचा किसान आंदोलन में, जहां से भेजा गया बाल देखभाल केंद्र, अब रमेश व अनुज को अपने माता-पिता से मिलने का इंतजार.


Child Protection Officer, Aarti 


City Life Haryanaसोनीपत / जहां चाह-वहां राह - यह कहावत बाल संरक्षण अधिकारी (गैर-संस्थानिक) आरती पर सटीक बैठती है, जिन्होंने खोए हुए बच्चों को उनके अभिभावकों तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि एक बालक तो दूसरे देश नेपाल का निवासी था और दूसरा गुजरात का। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और दोनों बच्चों के अभिभावकों को ढूंढ़ निकाला गया। जल्द ही सभी कानूनी औपचारिकताओं को पूर्ण कर दोनों बच्चों को उनके अभिभावकों को सौंप दिया जाएगा।

जिला बाल संरक्षण अधिकारी डा. रितु के निर्देशन में बाल संरक्षण अधिकारी आरती व बाल संरक्षण अधिकारी (संस्थानिक) ममता शर्मा ने नेपाल के 14 वर्षीय बालक रमेश व गुजरात के 16 वर्षीय अनुज के अभिभावकों की खोजबीन में सफलता प्राप्त की है। दोनों बच्चों के अभिभावकों को खोज निकालने की जिम्मेदारी लेते हुए बाल संरक्षण अधिकारी आरती ने नियमित रूप से कोशिश जारी रखी। इस कार्य में उनका विशेष रूप से सहयोग दिया ममता शर्मा ने।



बाल संरक्षण अधिकारी आरती के अनुसार नेपाल के रमेश को उसकी सौतेली माँ ने शिमला की बस में बिठाकर हिंदुस्तान भेज दिया था। शिमला में रमेश नमकीन बनाने वाली फैक्टरी में काम कर गुजर-बसर करने लगा। किंतु उसे अपने पिता व भाई की याद सताने लगी, जिनसे मिलने के लिए वह स्वयं प्रयासरत रहने लगा। ऐसे में वह शिमला से 19 दिसंबर 2020 को किसान आंदोलनकारियों की बस में सवार होकर कुंडली-सिंघु बार्डर सोनीपत में चल रहे धरने में जा पहुंचा। जहां उसकी जानकारी मिलने पर सपना बाल कुंज में भेज दिया गया। काउंसलिंग करने पर उसने खुद को नेपाल का निवासी बताया।

इतनी सी जानकारी मिलते ही पीओ आरती ने नेपाल दूतावास तथा क्राइम ब्रांच पंचकूला व एक संबंधित एनजीओ में लगातार संपर्क जारी रखा। क्राइम ब्रांच के राजेश की मदद से रमेश के परिजनों की सटीक जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने परिजनों से संपर्क साधा। इसी प्रकार वे बताती हैं कि गुजरात का अनुज घरवालों से आपसी बहस के चलते घर छोडक़र निकल गया था और भटकते हुए 9 फरवरी 2017 को मुंडलाना (गोहाना) पहुंच गया। तब से ही अनुज के अभिभावकों की खोज की जा रही थी, जिसमें अब सफलता मिल गई है। लॉकडाउन में उन्हें अतिरिक्त समय मिला, जिसका लाभ उठाते हुए बच्चों के परिजनों को ढूंढऩे के प्रयासों को तीव्र गति प्रदान की गई। नतीजतन सफलता हाथ लगी।

बाल संरक्षण अधिकारी आरती कहती हैं दोनों बच्चों के अभिभावकों को खोजने में सपना बाल कुंज की संचालक सोनिया तथा डीसीपीओ कार्यालय की उपासना ने विशेष सहयोग प्रदान किया। साथ ही उन्होंने बताया कि दोनों बालकों के अभिभावकों से बातचीत की जा चुकी है और दोनों के कागजातों को सत्यापित करवाने उपरांत सीडब्ल्यूसी के माध्यम से अभिभावकों के सुपुर्द किया जाएगा। अनुज व रमेश को अपने परिजनों से मिलने का बेसब्री से इंतजार है। उनकी प्रतीक्षा जल्द खत्म होगी और वे खुशी-खुशी अपने परिवार के साथ जीवन बसर कर सकेंगे।



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