The Mukhyamantri Bal Sewa Yojana which was announced by Haryana Chief Minister with the aim to rehabilitate and assist children below 18 years of age who have lost both their parents / surviving parent / legal guardian / adoptive parent(s) due to COVID– 19 last month has been given the green flag from the Legal Remembrancer Department, Finance Department, Council of Ministers.
While giving further information, an official spokesperson said that the scheme has also been approved in the meeting of Standing Finance Committee held on June 10, 2021. He said that under the scheme benefits will be provided to the beneficiaries already identified by the districts. This includes Financial Assistance for Children in Non - Institutional Care living with their extended family / guardians will be supported with an amount of
एक सरकारी प्रवक्ता ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि 10 जून 2021 को हुई
स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की बैठक में भी इस योजना को मंजूरी दे दी गई है।
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत जिलों द्वारा चिन्हित किए जा चुके
लाभार्थियों को लाभ प्रदान किया जाएगा।
गैर-संस्थागत देखभाल में बच्चों के लिए वित्तीय सहायता
इस योजना के तहत माता-पिता की मृत्यु के बाद जिन बच्चों की देखभाल परिवार के
अन्य सदस्य कर रहे हैं,
ऐसे बच्चों के पालन पोषण के लिए 18 वर्ष तक 2,500 रुपये प्रति बच्चा प्रति मास राज्य सरकार की ओर से परिवार को दिए जाएंगे। इस
राशि में 2,000 रुपये प्रति माह की राशि केंद्र प्रायोजित
योजना के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
He further informed that an additional financial assistance of Rs 12,000 per annum will be provided to the extended family / guardian for educational purpose of the child. This assistance will be deposited in the joint bank account of the child & extended family / guardian till the child attains the age of 18 years.
इसके अतिरिक्त, 18 वर्ष की आयु तक बच्चे की पढ़ाई के लिए 12,000 रुपये प्रति वर्ष राशि परिवार को दिए जाएंगे। यह राशि बच्चे की देखभाल कर रहे अभिभावक या परिवार के संयुक्त बैंक खाते में जमा करवाई जाएगी। हरियाणा में 59 बाल देखभाल संस्थान हैं। इसके अलावा, 18 वर्ष की आयु तक 1500 रुपये प्रतिमाह की वित्तीय सहायता आवर्ती जमा खाते में जमा की जाएगी और 21 वर्ष की आयु होने पर बच्चे को मैच्योरिटी राशि दे दी जाएगी।
किशोरियों के लिए संस्थागत देखभाल और शिक्षा
प्रवक्ता ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण जिन लड़कियों ने किशोरावस्था में
अपने माता-पिता को खोया है,
उन्हें कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय
(केजीबीवी) में आवासीय शिक्षा मुफ्त दी जाएगी। इसके अलावा, माता-पिता की
मृत्यु के बाद बच्चों की देखभाल कर रहे परिवार के मामले में दिए जाने वाले लाभ, जैसेकि 18 वर्ष तक 2,500 रुपये और अन्य खर्चों के लिए 12,000
रुपये प्रति वर्ष, इन किशोरियों को
दिए जाएंगे। राज्य में 25
केजीबीवी हैं, जो कक्षा 6 से 8वीं तक शिक्षा
प्रदान करते हैं। 8
केजीबीवी कक्षा 6वीं से 10वीं तक शिक्षा
प्रदान करते हैं और 3
केजीबीवी कक्षा 6 से 12वीं तक शिक्षा
प्रदान करते हैं।
विवाह पर लडकियों को सहायता
The spokesperson said that girls orphaned due to Covid will be supported under 'Mukhyamantri Vivaah Shagun Yojana ' with financial assistance of Rs 51000 for their marriage. The amount would be maintained in the name of the girl child to be redeemed along with accumulated interest at the time of marriage, he added.
कोविड महामारी के कारण माता-पिता की मृत्यु के बाद अनाथ हुई लड़कियों को
मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना के तहत 51000
रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि
बालिका के नाम पर बैंक में रखी जाएगी और विवाह के समय उन्हें ब्याज सहित पूरी राशि
दी जाएगी।
कक्षा 8-12 में बच्चे के लिए टैबलेट
प्रवक्ता ने बताया कि कक्षा 8वीं से 12वीं के बीच या
व्यावसायिक पाठ्यक्रम में किसी भी कक्षा में पढऩे वाले बच्चों को उनकी शिक्षा में
सहायता के लिए एक टैबलेट प्रदान किया जाएगा ।
प्रवक्ता ने बताया कि गैर-संस्थागत देखभाल में बच्चों के लिए वित्तीय सहायता
और विवाह पर लडकियों को सहायता का लाभ प्रदान करने के लिए महिला एवं बाल विकास
विभाग नोडल विभाग होगा और संबंधित उपायुक्त के समन्वय के साथ योजनाओं का
कार्यान्वयन करेगा। इसी प्रकार,
किशोरियों के लिए संस्थागत देखभाल और शिक्षा
और कक्षा 8-12 में बच्चे के लिए टैबलेट का लाभ प्रदान करने
के लिए स्कूल शिक्षा विभाग नोडल विभाग होगा।
प्रवक्ता ने बताया कि विवाह पर लडकियों को सहायता देने के संबंध में अनुसूचित
जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ‘विवाह के शीघ्र पंजीकरण’ योजना के तहत 3100 रुपये का लाभ
प्रदान करने के लिए नोडल विभाग होगा। जिला प्रोग्राम ऑफिसर, महिला एवं बाल
विकास विभाग समय पर इस लाभ का वितरण सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने बताया कि जिला उपायुक्त योजना के पैटर्न होंगे और योजना के तहत लाभ
सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे। प्रवक्ता ने बताया कि पात्र बच्चों की
जानकारी डीसीपीओ बाल देखभाल संस्थान से मंजूरी लेने के बाद जिला उपायुक्त की
अध्यक्षता में गठित अनुमोदन समिति को भेजेगा।
.png)



