Three
Children Drowned In Yamuna River In-
हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा पर यमुना नदी में नहाते
वक्त डूबने से तीन किशोरों की जान चली गई, चार घंटे की
कड़ी मशक्कत के बाद सभी के शव बाहर निकले गए.
City
Life Haryana। रादौर / उत्तर प्रदेश के गांव ढिक्का टपरी के समीप यमुनानदी में
नहाते समय डूबे क्षेत्र के 3 किशोरो का सरसावा पुलिस ने पोस्टमार्टम करवा शव
परिजनों को सौंप दिया। चार घंटे की कड़ी
मशक्कत के बाद सभी के शव बाहर निकले गए। जिसके बाद तीनों का
उनके गांवों में संस्कार किया गया। तीनों किशोरो की मौत एक हादसा है। जिसके आधार
पर ही पुलिस ने आगामी कार्रवाई की है।उत्तर प्रदेश के सरसावा थाना के एस.ओ प्रवीन कुमार ने
बताया कि परिजनों ने ब्यान के आधार पर कार्रवाई की गई है। ब्यान में परिजनों ने
उनके यमुनानदी में नहाते समय हादसा होने की बात कही है।
गरीब परिवारों पर टूटा है दु:खो का पहाड़, राहुल व विशेष को
बनना था परिवार का सहारा हादसे में मारे गएं किशोर सारन निवासी राहुल, बरहेड़ी निवासी
विशेष व नाहरपुर निवासी हैप्पी तीनों गरीब परिवार से संबंध रखते है। तीनों का
परिवार ही मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा है। लेकिन इनमें से
राहुल व विशेष की स्थिति ऐसी थी कि परिजनों को उनसे परिवार को संभालने की उम्मीद
थी। सारन निवासी राहुल के माता पिता मजदूरी करते है। राहुल तीन बहनों का इकलौता
भाई था। परिवार को उम्मीद थी कि राहुल जल्द ही अपने परिवार को संभाल लेगा। बेटियों
की शादी में भी वह सहारा बनेगा लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। अब बहनों का
रो-रो कर बुरा हाल है। वहीं विशेष के पिता की मृत्यु कई वर्ष पहले हो चुकी है। तीन
भाई बहनो में विशेष सबसे बड़ा था। पिता की मौत के बाद मां मजदूरी कर उनका पालन
पोषण कर रही थी। उम्मीद थी कि जल्द ही बेटा भी परिवार को चलाने में हाथ बटाने
लगेगा।
-प्रशासन की सुस्ती और लोगों में जागरूकता का अभाव देता है
हादसों का जन्म
गर्मी की तपन से छुटकारा पाने के लिए हर वर्ष सैंकड़ों की
संख्या में युवा नहरों व यमुनानदी में नहाने के लिए जाते है। लेकिन कुछ लोगों का
नहाने का यह शौक उन्हें मौत के आकोश में सुला देता है। हर वर्ष होने वाले हादसों
पर प्रशासन न तो अभी तक कोई बड़ा सबक नहीं लिया लेकिन लोगों में भी जागरूकता नहीं
आई। जो बड़े हादसों का कारण बनता है। अगर लोगों में जागरूकता आएं और उनकी जागरूकता
से यमुनानदी व नहरों पर जाने से युवाओं व बच्चों को रोका जा सके तो यह हादसें रूक
सकते है। प्रशासन भी अभी तक कोई सख्ती व हादसें रोकने के लिए पुख्ता प्रबंध नहीं
कर सका है। जिससे घटनाएं बढ़ रही है।