स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि लव जिहाद एक खामोश आतंकवाद है, जिस की साजिश लगातार रची जा रही है, इसमें एक विशेष समुदाय के लोग हिंदू धर्म की युवतियों को निशाना बनाते हैं.
![]() |
|
![]() |
लव जिहाद जैसे मामलों को भी गंभीरता से लेकर इसे जड़ से समाप्त किया जाएगा। यह शब्द मानव निर्माण अभियान के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी सुशील गिरी सच्चिदानंद ने कहे।वह शनिवार को भाजपा महामंत्री धनपत सैनी के कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि हम कब तक सीता को रुबिया बनने देंगे, कब तक हम सीता को मरने देंगे? मुझे नरगिस और सुनील दत्त की तरह सच्चा प्यार दिखाओ। बताइए, कितनी नरगिस ने सुनील दत्त से शादी की? उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम संगठनों और कांग्रेस द्वारा विरोध करने से कुछ नहीं होगा। यह षड्यंत्र चल रहा है। हमारा विधेयक वोट के खातिर नहीं, बल्कि संस्कृति की रक्षा के लिए है।
स्वामी सच्चिदानंद बोले लव जिहाद एक खामोश आतंकवाद है। जिस की साजिश लगातार रची जा रही है। इसमें एक विशेष समुदाय के लोग हिंदू धर्म की युवतियों को निशाना बनाते हैं और अपने आकाओं द्वारा दी गई हिदायतो का पालन करवाने का प्रयास करते हैं। इस खामोश आतंकवाद से निपटने के लिए सनातन संस्कृति से जुड़े लोगों को और अधिक जागरूक होने की जरूरत है। हमें अपने परिवार के बीच बैठकर इस विषय को गंभीरता से लेना चाहिए और इस पर परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत भी करनी चाहिए। तभी इस गंभीर मुद्दे से आसानी से निपटा जा सकता है। अगर हमारे बच्चों को इस षड्यंत्र के बारे पूर्ण जानकारी होगी तो यह षड्यंत्र फलने फूलने में नाकाम साबित होगा।
वही, इसके लिए देश व प्रदेश की सरकार को भी सख्त कदम उठाने की जरूरत है।पिछले दिनों उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने इस विषय को काफी गंभीरता से लिया और इस पर सख्त कानून लागू किया।इसी प्रकार यह कानून पूरे देश में सख्ती के साथ लागू होना चाहिए और लव जिहाद के मामलों में दोषी लोगों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए, क्योंकि उनका षड्यंत्र न केवल सनातन संस्कृति के खिलाफ है बल्कि देश विरोधी ताकते भी इस षड्यंत्र में भागीदार बनी हुई है और देश विरोधी ताकतों का साथ देने वाले लोग देशद्रोही हैं। उनके लिए फांसी के अलावा कोई भी सजा छोटी है।
मौके पर हंसराज
सैनी, भागवत आचार्य देवेश शास्त्री,
धनपत सैनी, अशोक जोहल, मुकेश सैनी, विजय धीमान, जितेंद्र, संदीप व प्रवीण
इत्यादि मौजूद थे।