स्वामी विवेकानंद जयंती पर स्कूल में हुआ भाषण प्रतियोगिता का आयोजन
इस अवसर पर स्कूल में भाषण प्र्रतियोगिता का आयोजन भी हुआ, जिसमें स्कूल के
नौवीं से बारहवीं कक्षा के छात्रो ने भाग लिया। प्रतियोगिता में ग्यारहवीं
कक्षा की शिवानी प्रथम सबसे प्रभावी भाषण देकर प्रथम पुरस्कार हासिल किया जबकि 12वीं की माही दूसरे व
दीपाली तीसरे स्थान पर रही। विजेताओ को स्कूल प्रबंधक सुरेश कांबोज व कमलेश कांबोज
ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया और अपने संबोधन में कहा कि युवा शक्ति राष्ट्रीय
गौरव का प्रतीक है। किसी भी राष्ट्र की प्रगति का एक मजबूूत स्तंभ युवा होते है।
इसलिए उठो,जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक न रूको। यही स्वमी विवेकानंद ने
युवाओ को प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद पहले ऐसे युवा व्यक्तित्त्व
थे, जिन्होंने अमेरिका के शिकागो में जाकर अपने संबोधन में भाईयो और
बहनो शब्द का प्रयोग कर सभी को तालियां बजाने पर विवश कर दिया था। उसके बाद जो
विचार वहां पर रखे उनका पूरा दुनियां ने लोहा माना। देशभक्ति की भावना उनके अंदर
बचपन से ही भरी हुई थी। भारत माता का सम्मान करना व अन्य लोगों को भी इसके लिए
प्रेरित करना उनका ध्येय था। उनका ओजस्वी भाषण भारत की पहचान बना। उनका युवा जीवन
देश व विदेशो के युवाओ के लिए एक पहचान बना हुआ है।
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