25 जून 1975 को एक ऐसा जुल्म सरकार द्वारा किया जिससे बेकसूर लोगों को यातनाएं सहनी पड़ी, राजनीतिक द्वेष के कारण देशभक्त लोगों को जेलों में डाला गया, प्रचारकों की हत्याएं की गई, इतना ही नहीं युवाओं के जबरन ऑपरेशन करवाए गए, मीडिया पर पाबंदियां लगाई गई.
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करनाल। हरियाणा सरकार के शिक्षा एवं वन
पर्यावरण मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि 25 जून 1975 को कांग्रेस ने जो जुल्म किया उसको सुनकर आज भी रोंगटे खड़े
हो जाते हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने अपने स्वार्थ के लिए निर्दोषों के साथ
यातनाएं की और लोकतंत्र का गला घोंटकर लोगों की आजादी को समाप्त करने का काम किया।
इस दिन को वर्तमान पीढ़ी को याद दिलाने के लिए देश में भाजपा काला दिवस के रूप में
मना रही है।
मंत्री शुक्रवार को भाजपा कार्यालय में एमरजेंसी को लेकर कार्यकर्ताओं द्वारा मनाए जा रहे काला दिवस के अवसर पर बोल रहे थे। इस अवसर पर एमरजेंसी में यातनाएं सहने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मानित भी किया गया। इन कार्यकर्ताओं ने एमरजेंसी में दी यातनाओं के बारे में अपने अनुभव सांझा किए।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि 25 जून 1975 को एक ऐसा जुल्म सरकार द्वारा किया जिससे बेकसूर लोगों को
यातनाएं सहनी पड़ी, राजनीतिक द्वेष के कारण देशभक्त लोगों को जेलों में डाला
गया, प्रचारकों की हत्याएं की गई। इतना ही नहीं युवाओं के जबरन
ऑपरेशन करवाए गए। मीडिया पर पाबंदियां लगाई गई। इस विषय को याद दिलाने के लिए पूरे
देश में काला दिवस मनाया जा रहा है। लोकतंत्र की रक्षा के लिए जिन लोगों ने
एमरजेंसी में यातनाएं सहीं, आज उनको नमन करने का दिन है।
- कंवरपाल बोले कांग्रेस पार्टी की
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने निजी स्वार्थ के लिए देश में एमरजेंसी लगाई। इस
एमरजेंसी से लोकतंत्र की हत्या हुई, युवाओं की जबरन नसबंदी की गई, फिल्मों पर रोक लगाई गई, परंतु आज विपक्ष के
लोग एमरजेंसी में दिए गए दुखों को भुलाना चाहते हैं। भाजपा युवा पीढ़ी को 25 जून 1975 से 19 महीने की एमरजेंसी
की याद ताजा करना चाहती है और उन लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित करना चाहती है
जिन्होंने उस समय यातनाएं सहकर अपने देश को बचाया। उन्होंने कहा कि कुछ पार्टियां
झूठा प्रचार करके देश की छवि को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं जोकि सबके लिए गलत
है।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के कार्यकर्ताओं के लिए आज महत्वपूर्ण दिन है, उन्हें इस
कार्यक्रम के माध्यम से बताया जाएगा कि एमरजेंसी में कितनी यातनाएं लोगों ने सही
हैं। एमरजेंसी में गुलामी के दौरान भी अंग्रेजों और मुगलों ने इतनी यातनाएं नहीं
दी जितनी 19 महीनों में आजाद देश की सरकार ने दी है। जबकि कांग्रेस के
लोग कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस कार्यकाल में लोगों को यातनाएं
सहनी पड़ रही हैं, अभिव्यक्ति की आजादी खत्म हो गई है। इस पर उन्होंने कहा कि
जो लोग खुलेआम प्रधानमंत्री तक को गाली-गलौच करते हों और नेताओं को गंदे से गंदा
बोलते हैं, क्या उनकी अभिव्यक्ति की आजादी खत्म हो गई है.?