देश की आजादी के लिए भारत मां के कई वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुती दी थी. जिसमें से राजगुरु भी एक हैं. अंग्रेजी शासन की हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए उन्होंने ‘पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्ट्रीब्यूट बिल’ के विरोध में सेंट्रल असेंबली में बम फेंके थे. जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और फांसी की सजा दे दी गई.
इस अवसर पर वरयामसिंह ने कहा कि शहीद राजगुरू के दिल
में बचपन से देश में प्रति बहुत प्रेम था, वह शुरू से ही अपने देश के लिए कुछ करना
चाहते थे। वाराणसी में पढ़ाई के दौरान इनका संपर्क चन्द्रशेखर आजाद से हुआ। जिसने
इनके देशप्रेम को इतना बढ़ा दिया कि वह देश की आजादी की लड़ाई में उसके साथ हो
लिएं। चन्द्रशेखर आजाद उनके विचारो व भावनाओ से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें अपने
दल में मिला लिया और खुद ही राजगुरू को निशानेबाजी सुनाई। उन्होनें कहा कि आज हम
जिस आजाद देश की खुली हवा में सांस ले रहे है वह राजगुरू जैसे शहीदो की देन है।
जिन्होनें अपने प्राणो की परवाह न करते हुए देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी और
अंग्रेजो से लोहा लिया। उनका जीवन हमें प्रेरणा देता है कि हम सभी मिलकर देशहित के
लिए कार्य करे जिससे कि हमारा देश प्रगति में पथ पर तेजी के साथ आगे बढ़े।
उन्होनें कहा कि देश हित के साथ साथ हमारा यह भी कत्र्तव्य बनता है कि हम शहीदो के
सम्मान पर भी ध्यान दे और उन्हें उनका वह सम्मान दिलवाने की लड़ाई लड़े जिसके वह
सही हकदार है लेकिन अभी तक हमारे देश में उन्हें उनका यह हक नहीं मिल पाया है। इस
अवसर पर अधिवक्ता सर्वजीत सिंह, मास्टर रतन सिंह, अवतार सिंह, पंकज, सोनू, गुरनुर सिंह, हरचरण सिंह, सूरज इत्यादि उपस्थित थे।
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