भारतीय किसान संघ ने कहा कि केंद्र के नए कृषि कानूनों में 'सुधार' की जरूरत है. जिसको लेकर किसानों का एक वर्ग विरोध कर रहा है.
वही,, भारतीय किसान संघ 8 सितंबर को पूरे देश में जिला स्तर पर धरनें प्रदर्शन किएं जाएंगें। जिसमें प्रधानमंत्री के नाम जिला उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा जाएंगा। यह निर्णय गत दिनों सोनी में हुई संघ की बैठक में लिया गया था। जिसके अनुसार धरनें प्रदर्शन को लेकर रणनीति बनानी शुरू कर दी गई है।
यह जानकारी देते हुए भारतीय किसान संघ के प्रदेश मंत्री रामबीर सिंह उन्हेड़ी व प्रदेश प्रचार प्रमुख विकास राणा ने बताया कि हरियाणा के सभी जिलो में 8 सितंबर को बडी संख्या में किसान सचिवालयों पर एकत्रित होगें और तीनों कृषि कानूनों में संसोधन कर किसानों को लागत मूल्य के अनुसार लाभकारी मूल्य दिएं जाने की मांग सरकार से करेगें। उन्होनें कहा कि भारतीय किसान संघ न्यूनतम समर्थन मल्य के स्थान पर लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दिएं जाने की मांग कर रहा है। जिसके लिए संसद में कठोर कानून पास होना चाहिएं। ताकि इससे कम कीमत पर किसान की फसल खरीदने वाले को सजा का प्रावधान भी हो।
उन्होंने कहा कि देश का किसान लगभग 6 हजार फसलें उगाता है और इन सभी किसानों को लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य मिलना उनका अधिकार है। किसान की फसल की खरीद चाहे सरकार करें या फिर व्यापारी लेकिन कम कीमत पर फसल खरीदने पर जुर्माने व सजा का प्रावधान होना जरूरी है। भारतीय किसान संघ शुरूआत से ही तीनों कृषि कानूनों में संशोधन की मांग करता आ रहा है। जिसके तहत किसानों की फसल खरीदने वाले सभी व्यापारियों के पंजीकरण की मांग भी संघ की ओर से की जा रही है। उनकी बैंक गांरटी भी एक पोर्टल पर जारी होनी चाहिएं। इसके अलावा प्रत्येक जिलों में कृषि न्यायालयों की स्थापना भी होनी चाहिएं। जिससे किसान से संबंधित किसी भी विवाद के लिए वह इस न्यायालय का सहारा ले सके।
उन्होने कहा कि 8 सितंबर के आंदोलन को
की रूपरेखा तैयार करने के लिए प्रदेश स्तरीय बैठक का आयोजन 28 अगस्त को जींद में
किया जाएंगा। जिसमें पूरे प्रदेश से किसान नेता भाग लेगें और आंदोलन की मजबूती के
लिए अपनी अपनी राय देगें। उन्होंने कहा कि इस बार संघ ने किसानों के हित में आरपार
की लड़ाई लडऩे का मन बना लिया है। अगर उनकी मांगो पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो
किसान इस आंदोलन को अनिश्चितकाल तक छेड़ेगें।