किसानों की सभी शंकाएं हो चुकी है दूर : धनखड़
City Life Haryana | यमुनानगर : बीजेपी के मंडल कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर में आज बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ पहुंचे। उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं से कई मुद्दों पर बातचीत की। वही मीडिया से बात करते हुए ओ पी धनखड़ ने कहा कि कृषि कानूनों को लेकर सभी बिंदु क्लियर हो चुके है।जो भी किसान संगठनों की शंकाये थी दूर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अब किसान संगठनों ने तय करना है की आंदोलन को कैसे रखना है , उन्होंने कहा की में समझता हु की आंदोलन करने में ही नही आंदोलन वापिस लेने में भी ताकत होती है ।
मीडिया से बात करते हुए ओपी धनखड़ ने कहा कि हमारे 300 मंडल है । हर मंडल में लगभग 100 कार्यकर्ता सक्रिय रहते हैं और 30,000 कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण होना है । प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने आज में आया हूं। खासकर किसानों के मुद्दे पर बातचीत की है कि। जो भी कृषि कानून है उन कानूनों के संबंध में केंद्र सरकार के सामने जो मुद्दे रखे थे सभी एक-एक करके केंद्र सरकार ने जवाब दिया है। और किसानों के जितने भी शंकाएं थी सब को दूर किया गया । आगे भी केंद्र सरकार बातचीत के लिए तैयार है ।
सरकार किसानों को समझाने में कहां तक फैल रही है इस सवाल का जवाब देते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़ ने कहा कि : जो बातें हुई हैं सब मीडिया के सामने रखी हैं जो भी बिंदु थे वह सब क्लियर हो गए हैं। जो भी किसानों ने बातें की सब स्वीकार की गई है । अब किसान संगठनों को तय करना चाहिए , मीडिया के माध्यम से कहना चाहता हूं की केवल आंदोलन करने में ताकत नहीं होती आंदोलन को वापस लेने में भी ताकत होती है । आंदोलन ऐसा नहीं है कि आपके हाथ से निकल जाएगा यह आपके हाथ में ही है ।जितने भी मुद्दे थे किसान संगठनो ने रखे सभी का समाधान केंद्र सरकार ने करने का पूरा प्रयास किया है । उसके बाद भी बातचीत को ओपन रखा है ।आपकी ताकत आंदोलन को वापस लेने में भी है ।गांधीजी भी आंदोलन करते थे वापस लेते थे ।
किसानों द्वारा बीजेपी नेताओं का विरोध किया जा रहा है हाल ही में यमुनानगर में सांसद नायब सैनी का विरोध किया गया किसानों द्वारा खुद ही उद्घाटन कर दिया गया: इस सवाल का जवाब देते हुए ओपी धनखड़ ने कहा कि हर आंदोलन की अपनी एक मर्यादा होती है। आंदोलन तब ही ताकतवर होता है जब अपनी मर्यादा में हो । लोकतंत्र की प्रक्रिया मर्यादा की प्रक्रिया है । लोकतंत्र पर सारे जो विषय होते हैं वह भी मुद्दों के होते हैं। यह किसान संगठनों ने तय करना है वह किस प्रकार से शालीनता पूर्वक लोकतांत्रिक पद्धति से अपनी बात को रखे और किस प्रकार से रखने में उनकी ताकत है
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