दूसरी तरफ इन तीन किसान विरोधी कानूनों को सही भी ठहरा रही है
उन्होंने कहा कि
आज देश का किसान अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहा है। सरकार को
बिना एक पल की देरी किये तीनों कृषि कानूनों को रद्दकर उनकी सभी मांगों को स्वीकार
करना चाहिए।
उन्होंने हरियाणा की गठबंधन सरकार की सहयोगी JJP पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव और सरकार बनते समय चेताया था। कि जेजेपी वोट किसी की और सपोर्ट किसी और का करेगी, आज उनकी एक-एक बात सही साबित हुई है। हुड्डा ने कहा कि जेजेपी कुर्सी और किसान में फर्क नहीं कर पा रही है। निजी स्वार्थ और सत्ता के लोभ में वो कुर्सी से चिपकी हुई है जबकि उन्हें किसानों का साथ देना चाहिए। किसान की पीड़ा से उन्हें कोई सरोकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि
हरियाणा सरकार का रवैया किसानों के प्रति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहा है। संविधान के
दायरे में शांतिप्रिय ढंग से चल रहे किसान आन्दोलन को दबाने के लिए हरियाणा में
शांतिपूर्ण तरीके से केंद्र सरकार से अपनी बात कहने जा रहे आंदोलनकारी किसानों पर
वाटर कैनन, आँसू गैस और लाठियाँ
चालाई गईं।
किसानो को अपनी
जायज मांग के लिए दिल्ली आने से नहीं रोकना चाहिए था। अगर किसानों को पहले ही बिना
किसी रोक-टोक के आने दिया होता तो अब तक यहाँ पहुंच कर फैसला भी हो गया होता।
उन्होंने इस बात
पर भी आपत्ति जताई कि सरकार किसानों पर झूठे मुक़दमे दर्ज करा रही है। उन्होंने
सरकार को चेताया कि जोर-जबरदस्ती से किसानों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता,
उनके अधिकारों को छीना नहीं जा सकता। सरकार का
दमनकारी रवैया आने वाले समय में उसे महंगा पड़ेगा।
उन्होंने आगे कहा कि एक तरफ सरकार बेमन से बातचीत का दिखावा कर रही है और दूसरी तरफ इन तीन किसान विरोधी कानूनों को सही भी ठहरा रही है। यही कारण है कि किसानों को सरकार की बात पर भरोसा नहीं हो रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी और एमएसपी से कम पर खरीदने वाले के लिए सजा का कानूनी प्रावधान जब तक नहीं होगा तब तक किसी क़ानून का किसानों के लिए कोई औचित्य नहीं है।
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