26 जनवरी को हिंसा में तलवारबाजी हुई उसमे किसान और जवान में कोई फर्क नहीं रहा
उन्होंने कहा कि जिन कृषि कानूनों को लेकर किसान विरोध जता रहे है उन्हें लेकर सरकार को किसानों की बात सुननी चाहिए तांकि आम जनता का ब्रेन वाश करके उसे भड़काया न जा सके। माँ सरस्वती एनजीओ की प्रेजिडेंट अतिका सिक्का ने किसानी आंदोलन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लाल किले पर झंडा फेहराये जाने का किसानी आंदोलन की लड़ाई से कोई संबंध नहीं जबकि इसके पीछे की कुछ और राजनीती है जिसका जरिया भोले भाले किसानों को बनाया जा रहा है।