किसानों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में उनकी जमीन को अभी तक दरियाबुर्द दिखाया गया है जबकि उनकी भूमि में अब बेहतर खेती होती है, जिससे उन्हें भूमि की मार्किट वेल्यू के अनुसार मुआवजा मिलना चाहिएं.
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*मार्केट कीमत के अनुसार
मूल्य नहीं मिलने तक रजिस्टरी नहीं करवाएंगे किसान *किसान बोले 8 लाख
मुआवजा देने का प्रयास, लेकिन 16 लाख
से अधिक उनका हक |
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- किसान बोले 8 लाख मुआवजा देने का प्रयास, लेकिन 16 लाख से अधिक उनका हक
किसान शिवकुमार, सुशील, लखन, राजपाल, शीशपाल, रामप्रसाद, अमीचंद नंबरदार का कहना है कि उनकी जमीन पहले दरियाबुर्द थी। जमीन के ऊपर से पानी चलता था। लेकिन पिछले कई वर्षों से उनकी जमीन में बेहतर खेती होने लगी है। लेकिन राजस्व विभाग में रिकॉर्ड पुराना ही है। अब पीडब्लयूडी विभाग ने ओवरब्रिज के निर्माण के लिए उनकी भूमि का अधिग्रहण किया है। लेकिन उनकी भूमि के रेट दरियाबुर्द के हिसाब से ही लगाएं है, जो कि गलत है। विभाग की ओर से बेहतर भूमि का 16 लाख प्रति एकड़ से अधिक मूल्य विभाग दे रहा है। जबकि उन्हें केवल 8 लाख रूपएं देने की बात कहीं जा रही है, जो कि गलत है। उनकी भूमि का भी उन्हें 16 लाख से अधिक मुआवजा मिलना चाहिएं। जिसको लेकर वह कई बार उच्चाधिकारियों से मिल चुके है। लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई विभाग ने नहीं की। अगर उन्हें विभाग उचित मुआवजा नहीं देता तो वह भूमि की रजिस्ट्री नहीं करवाएंगें।
- मामला नहीं सुलझा तो ओवरब्रिज के निर्माण में होगी देरी
किसान शिवकुमार का कहना है कि करीब 30 से 35 किसान
ऐसे है जिनकी भूमि के रेट को लेकर मामला उलझा है। किसानों की मांग जायज है। इसलिएं
विभाग को उस पर जल्द ही कार्रवाई करनी चाहिएं। पहले ही ओवरब्रिज के निर्माण में
काफी देरी हो चुकी है। जिसका खामियाजा क्षेत्र की जनता व किसानों को उठाना पड़ रहा
है। अगर अब भी प्रशासन इसमें ढील बरतता है तो ओवरब्रिज का निर्माण होने में और
अधिक देरी हो सकती है। इसलिएं प्रशासन मामले को जल्द से जल्द सुलझाएं।
वही, पीडब्ल्यूडी जेई विशाल कुमार राजस्व रिकॉर्ड में कुछ किसानों की जमीन के दरियाबुर्द के रेट लगे हुए है। लेकिन किसानों की मांग है कि यह रेट रिवाईज करवाएं जाएं। जिसको लेकर रिकॉर्ड बदलने की फाइल निदेशक कार्यालय चंडीगढ़ भेजी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही किसानों की समस्या हल हो जाएंगी।