He said that out of the total area under horticulture in the state, about 80 percent area is covered under cultivation of vegetable crops. He said this during a virtual workshop conducted on Horticulture at Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University today.
दलाल ने कहा कि किसानों को परम्परागत खेती से
आधुनिक खेती की तरफ बढ़ाया जाए, इसके लिए धरातल
पर अपने अनुभवों के आधार पर कृषि तकनीक को विकसित करने और कृषि व सम्बद्ध
क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्होनें
कहा कि प्रदेश में कुल बागवानी क्षेत्रफल में से लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्रफल सब्जियों का है।
The Agriculture Minister said that by
generating more awareness among farmers, eventually their interest towards
cultivation of crops consuming less water will increase that will also enhance
their annual profits. These days, water scarcity in farming is a huge concern
and ground water level is also decreasing day by day. Considering all these
factors, farmers these days are moving towards growing crops which are consuming
less water.
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश के किसानों को
अधिक जागरूक कर बागवानी की तरफ उनका रूझान बढ़ाया जाए ताकि वे परम्परागत खेती से कम
लागत व कम पानी वाली फसलों को उगाकर अधिक मुनाफा कमा सकें क्योंकि पानी की बहुत
बडी समस्या होती जा रही और पानी का लेवल भी नीचे गिर रहा है।
उन्होंने वर्कशाप में अधिकारियों और
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को कहा कि दिल्ली एन.सी.आर के आस-पास वाले क्षेत्र
में अधिक सब्जियां उगाई जाएं जिससे किसानों की आमदनी को और अधिक बढ़ाया जाए। जिसके
लिए उनको जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसी मार्किट को खड़ा किया
जाए जिससे किसानों को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
He said that
farmers should also be encouraged towards organic farming resulting in
enhancing land fertility and decreasing dependency on chemical fertilizers, which
helps in the reduction of cost and increase in crop production. Due to increase
in demand for organic products in the market, the income of the farmers will
also be increased.
किसानों को आर्गेनिक खेती की तरफ भी बढ़ाया
जाए। इससे भूमि की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ेगी और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से
लागत में कमी के साथ-साथ फसल उत्पादन में वृद्वि होगी।
उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय के
वैज्ञानिक खेतों में जाकर किसानों से उनकी समस्या के बारे जानकरी लेकर उस विषय पर
काम करें। ताकि किसान की सहायता कर उनको सक्षम बनाने में सफल हो सकें।
उन्होंने कहा कि अपने हाईब्रीड बीजों को
तैयार किया जाए ताकि किसानों को बाजार से महंगे दामों पर बीज न खरीदने पड़े।
उन्होंने कहा कि किसानों की आमदनी को 2022 तक दोगुना करने के लक्ष्य को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के
मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में कार्य कर रहे हैं।
Additional Chief Secretary, Agriculture
& Farmers Welfare Department, Dr. Sumita Misra directed the officials that
apart from the long-standing techniques, new techniques should also be adopted
which will prove to be helpful for the farmers. Horticulture is one of the
highest production and income generating sectors, she added.
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त
मुख्य सचिव डा सुमिता मिश्रा ने अधिकारियों को कहा लम्बे समय से चली आ रही तकनीकों
के अलावा नई तकनीकें भी अपनानी चाहिए जो किसानों की फसल के लिए मददगार साबित हो, समय के साथ-साथ हर क्षेत्र में बदलाव लाना
जरूरी है। बागवानी क्षेत्र आज के समय में सबसे ज्यादा उत्पादन एवं आय देने वाला
क्षेत्र है,
इसके लिए अधिकारियों को अधिक से अधिक कार्य करने
चाहिए।
इस अवसर पर वर्कशाप में कृषि एवं किसान
कल्याण विभाग के निदेशक श्री हरदीप सिंह, बागवानी विभाग के महानिदेशक निदेशक डाॅ अर्जुन सैनी, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय
के कुलपति प्रोफेसर बी.आर.कम्बोज और महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के
कुलपति प्रोफेसर समर सिंह सहित विभागों के अन्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुडें।