लोगों को जल बचाने का दिया संदेश, जल है तो कल है - जिला सलाहकार रजनी गोयल
यमुनानगर | NEWS - जल स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की जिला सलाहकार रजनी गोयल ने कहा कि उपायुक्त पार्थ गुप्ता के मार्गदर्शन में जल दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जल बचाओ-जीवन बचाओं का संदेश देने के लिए रैली का आयोजन किया गया। पृथ्वी और हमारे अस्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण तत्व जल है। विश्व जल दिवस 22 मार्च को प्रतिवर्ष मनाया जाता है।
जिला सलाहकार ने जल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि पिघलते ग्लेशियर और लगातार भूजल दोहन एवं ग्लोबल वार्मिंग के कारण हमारा पृथ्वी का भूजल सर लगातार नीचे जा रहा है। विश्व जल दिवस 2022 की थीम है भूजल स्तर अदृश्य को दृश्य मान बनाना। अत: हम सभी को मिलकर रैन वाटर हार्वेस्टिंग एवं अन्य उपायों द्वारा पानी की एक-एक बूंद बचानी है तभी जल की किल्लत से छुटकारा मिलेगा, क्योंकि पानी बनाया नहीं जा सकता इसे बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पानी की हमारी आवश्यकता लगातार बढ़ रही है जबकि उपलब्धता घट रही है अत: पानी हर हाल में बचाना है। कहीं भी पानी का दुरुपयोग नहीं होने देना है। रैली परशुराम चौक,स्वामी रामतीर्थ पार्क, सब डिवीजन नंबर तीन कार्यालय, नेहरू पार्क से होती हुई वापस कार्यालय पहुंची। विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, पंप ऑपरेटर, अप्रेंटिस ने जल बचाओ-जीवन बचाओ के नारे लगाते हुए लोगों को जल बचाने का संदेश दिया।
रजनी गोयल ने कहा कि हर व्यक्ति अगर पानी को रिड्यूस, रिसाइकल और रियूज़ करें तो 45 लीटर पानी प्रतिदिन बचा सकता है। भारत में औसतन एक व्यक्ति प्रतिदिन 45 लीटर पानी बर्बाद करता है। यह उसकी रोजाना की जरूरत 135 लीटर पानी की जरूरत का 30त्न है। इस बर्बादी को छोटे-छोटे उपाय द्वारा बचाया जा सकता है।
पानी को बचाने के उपाय -
जिला सलाहकार रजनी गोयल ने बताया कि नलो से टपकते पानी को रोक लिया जाएं, क्योंकि एक लीक नल से हर सेकंड एक बूंद पानी भी गिरता है तो साल में 100000 लीटर पानी बर्बाद होने से बचाया जा सकता है। ऑटोमेटिक वाशिंग मशीन से हफ्ते में 6 दिन थोड़े थोड़े कपड़े की जगह 3 दिन एक साथ कपड़े धोएं, क्योंकि एक औसत मशीन में एक बार 140 लीटर पानी लगता है। लो फ्लो शावर का इस्तेमाल करें। इससे 50 लीटर पानी प्रति मिनट लगता है हाई फ्लो शावर में, जबकि लो फ्लो शावर में 30 लीटर पानी। छत के पानी को जमीन में ले जाए तो 1 वर्ग मीटर से साल में 1000 लीटर पानी जमीन में पहुंच सकता है। 100 वर्ग मीटर का घर 100000 लीटर पानी जमीन में पहुंचा सकता है। घर में ग्रे-वाटर सिस्टम लगाने से वाशिंग मशीन, वॉश बेसिन आदि के पानी को रि-यूजेबल बना सकते हैं जिसे हम लान, फ्लश आदि में इस्तेमाल कर सकते हैं। इस अवसर पर उप मंडल अभियंता रोहित कुमार, जूनियर इंजीनियर ईश्वर सिंह, बीआरसी अशोक कुमार,दलजीत सिंह इलेक्ट्रीशियन, ओम प्रकाश सहित विभाग के कर्मचारियो ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
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