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Radaur- सफाई के नाम पर कस्बे के लोगों पर प्रति वर्ष 32 लाख का चार्ज लगाने वाली नपा सफाई के मामले में इन दिनों फिसड्डी साबित हो रही है


ऐसा नहीं है कि सफाई व्यवस्था को लेकर केवल स्थानीय लोग ही परेशान है. पार्षदों में भी इस बदहाल होती व्यवस्था को लेकर रोष देखा जा रहा है. जिसकी शिकायत वह अधिकारियों से कर रहे है लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है.



रादौर, डिजिटल डेक्स।। नगरपालिका के अधीन आने वाले क्षेत्र में करीब 3300 घर व 2 हजार के करीब दुकानें व कर्मिशलय संस्थान है। जिनसे नगरपालिका की ओर से डोर टू डोर कचरा उठान व सफाई व्यवस्था के नाम पर प्रति घर/दुकान कम से कम 600 रूपए प्रति वर्ष चार्ज लिया जाता है, जो करीब 32 लाख रूपए प्रति वर्ष बनता है।

सफाई के नाम पर कस्बे के लोगों पर प्रति वर्ष 32 लाख का चार्ज लगाने वाली नगरपालिका सफाई के मामले में इन दिनों फिसड्डी साबित हो रही है। न तो डोर टू डोर कचरा उठान की व्यवस्था सही है और न ही सफाई व्यवस्था को लेकर नपा गंभीर है। 

लोगों की माने तो कई कई दिनों तक कूडा उठाने की गाड़ी उनकी गली में नहीं पहुंचती। वहीं साफ सफाई करने वाले कर्मचारी भी कई कई दिन तक नदारद रहते है। कई बार लोग शिकायत कर चुके है लेकिन शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं हो रहा है। लोगों ने जिला उपायुक्त से इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।

गाड़ी न आने से कई दिन का कूडा घर में ही करना पड़ता है इकठा
सुरजीत सिंह, बलबीर, मुकेश, श्रवण कुमार, अशोक, दीपू, सचिन मेहता, प्रिंस इत्यादि ने बताया कि घर घर से कूडा उठाने की नगरपालिका की व्यवस्था बिल्कुल जीरों होती जा रही है। पहले जहां हर दिन घरों से कूडा लिया जाता था लेकिन पिछले कुछ महीनों से इस व्यवस्था का दिवाला पिट गया है। कई कई दिनों तक गाड़ी गलियों में कूडा लेने के लिए नहीं आती। जब पूछा जाता है तो हर बार बहाना बना दिया जाता है। 

जिससे घरों में कई कई दिन का कूडा एकत्रित हो जाता है। जिसे बदबू आनी शुरू हो जाती है। ऐसे में कूडे को संभाल कर रखना मुश्किल हो रहा है। घरों में गंदगी भी फैल रही है। लेकिन नपा इस ओर शिकायतों के बाद भी कोई ध्यान नहीं दे रही है। जबकि हर दिन घरों से उठान होना चाहिए इसके लिए भी नपा उनसे प्रतिवर्ष चार्ज भी वसूल रही है।

सफाई व्यवस्था का बुरा हाल, गलियों में खड़ी घासफूंस की सफाई करने नहीं आ रहे कर्मचारी

अवतार सिंह, संतोष रानी, रवि कुमार, सोनू, ईशू, राजेश कुमार व लाभ सिंह इत्यादि का कहना है कि हर वर्ष वह साफ सफाई का टैक्स नगरपालिका को देते है। लेकिन उसके बाद भी उन्हें सुविधा नहीं मिल रही है। गलियों में साफ सफाई करने की व्यवस्था जहां पहले काफी बेहतर भी वह अब दयनीय हो चुकी है। 

कई कई दिनों तक सफाई कर्मचारी गलियों में नहीं आते। बरसाती सीजन होने के कारण गलियों व साथ लगते प्लाटों में घास फंूस व भांग इत्यादि खड़ी है। जिसमें सांप बिच्छू इत्यादि जमा रहते है। जो हर दिन घरों में घुस रहे है। कई बार कर्मचारियों को इसकी सफाई के लिए बोला गया है। लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। जब सफाई के नाम पर टैक्स लिया जा रहा है तो सफाई व्यवस्था भी बेहतर होनी जरूरी है।

पार्षद भी जता चुके है रोष
ऐसा नहीं है कि सफाई व्यवस्था को लेकर केवल स्थानीय लोग ही परेशान है। पार्षदों में भी इस बदहाल होती व्यवस्था को लेकर रोष देखा जा रहा है। जिसकी शिकायत वह अधिकारियों से कर रहे है लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। पार्षद देवेंद्र लक्की ने बताया कि सफाई व्यवस्था से लोग इनते परेशान हो चुके है कि जल्द ही लोग कूडा लेकर नपा कार्यालय में ही पहुंचेगें और सफाई व्यवस्था के नाम पर दिए जा रहे चार्ज पर ब्रेक लगाएगें। 

कई बार हम इसकी शिकायत अधिकारियों से कर चुके है, लेकिन अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि उनकी ठेकेदार नहीं मान रहे है या फिर सफाई कर्मचारी। जो व्यवस्था बन रही है अगर हालत यही रही तो स्वच्छता में आगे रहने वाले रादौर की गिनती सबसे गंदे कस्बे में होगी।

सफाई निरीक्षक, निर्मल सिंह का कहना है कि समस्या उनके संज्ञान में भी आई है। दोनों ठेकेदार को इसमें सुधार के लिए बोला गया है। डोर टू डोर को दोबारा टेंडर होना है। जल्द ही सफाई व्यवस्था में सुधार करवाने का प्रयास किया जाएगा।

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