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𝐑𝐚𝐝𝐚𝐮𝐫 𝐍𝐞𝐰𝐬: अच्छी शिक्षा का यह कतई मतलब नहीं…कि उससे केवल अच्छें इंजीनियर, डाक्टर या अध्यापक ही बने

समाज के प्रति बच्चा अगर अपनी जिम्मेंदारी को समझना सीख जाएगा तो हमारा देश न केवल तेजी से विकसित देशों की श्रेणी में शामिल होगा बल्कि मानव मूल्यों व अपनी संस्कृति को बचाने में भी देश का स्थान सर्वोच्च होगा !



रादौर, डिजिटल डेक्स।। अच्छी शिक्षा का यह कतई मतलब नहीं है कि उससे केवल अच्छें इंजीनियर, डाक्टर या अध्यापक ही बनाए जा सके। अपितू अच्छी शिक्षा वह है जिससे बच्चों को उनकी योग्यता में वृद्धि करने के साथ साथ उन्हें एक अच्छा इंसान भी बनाया जा सके। मानवता का भाव व समाज और देश के लिए बच्चों में जज्बा होना चाहिए। 

समाज के प्रति बच्चा अगर अपनी जिम्मेंदारी को समझना सीख जाएगा तो हमारा देश न केवल तेजी से विकसित देशों की श्रेणी में शामिल होगा बल्कि मानव मूल्यों व अपनी संस्कृति को बचाने में भी देश का स्थान सर्वोच्च होगा। इसके लिए हमें एक नई पहल की जरूरत है। 


जिसें हमें सीखना होगा और उस पर अमल करते हुए ही छात्रों को शिक्षित करना होगा। यह बात लायंस क्लब की ओर से इंडियन पब्लिक स्कूल में आयोजित किए गए दो दिवसीय लायंस क्वेस्ट टीचर टे्रनिंग वर्कशाप में बतौर बी.एल जोशी ने कहे। वह कार्यक्रम में बतौर मुख्य प्रशिक्षक पहुंचे थे। 

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर व दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता क्लब के अध्यक्ष तरूण चावला ने की। जबकि प्रौजेक्ट चेयरमैन सुरेंद्र ढांडा रहे। स्कूल प्रबंधक ईश मेहता व क्लब के सदस्यों ने मुख्य प्रशिक्षक बी.एल जोशी को फूलों का गुलदस्ता देकर सम्मानित किया। शिविर में 40 से अधिक अध्यापकों ने भाग लिया।

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बी.एल जोशी ने कहा कि आज बच्चे कई प्रकार की ऐसी बुरी लतों का शिकार हो रहे है जिसे अभिभावक अभी तो हल्के में ले रहे है लेकिन इसके गंभीर परिणाम सामने आ रहे है। उनमें से मोबाइल की लत सबसे बुरी है। हालांकि शिक्षा के क्षेत्र में इसका प्रयोग भी जरूरी है लेकिन अनावश्यक प्रयोग होने से बच्चे का मानसिक विकास तो रूक ही रहा है साथ ही वह शिक्षा की गुणवत्ता से भी दूर होता जा रहा है। 

एक शिक्षक का यह कत्र्तव्य है कि वह बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा देने के साथ साथ उसे मानवीय मूल्यों के साथ भी जोड़े। अभिभावकों को भी यह समझने की जरूरत है कि शिक्षक को केवल शिक्षा देने वाले तक की सीमित न रखे बल्कि उसे वह अधिकार भी दे जो एक माता पिता अपने बच्चे को एक अच्छा व सफल इंसान बनाने के लिए प्रयोग करना चाहता है। 

स्कूल प्रबंधक ईश मेहता ने कहा कि आनंदपूर्ण शिक्षा देने व ग्रहण करने की जरूरत आज शिक्षा के क्षेत्र में है। क्योंकि अधिकांश छात्र शिक्षा को एक बोझ की तरह समझ लेने की भूल कर देते है। लेकिन अगर शिक्षक इस कार्य को आनंदपूर्ण बनाने में समक्ष है तो वह खुद भी एक बेहतर शिक्षक बन सकता है और बच्चों को भी एक सफल व्यक्ति बनने में मदद कर सकता है। 

इस अवसर पर स्कूल प्रबंधक ईश मेहता, क्लब के अध्यक्ष तरूण चावला, सचिव सुभाष सैनी, कोषाध्यक्ष संदीप सचदेवा, सुरेंद्र ढांडा, देवेंद्र सैनी, रविंद्र सैनी, राकेश कांबोज, सतीश सैनी, विपिन कांबोज, राजीव शर्मा, अजय शांडिल्य, डा. जसविंद्र सैनी, डा. शुभम सलूजा, ईशू सेठी, शालू मेहता, कुलवंत वर्मा, पम्मी खेड़की, सुखबीर सुक्खा इत्यादि मौजूद रहे।

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