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यमुनानगर : दो महिलाओं की दर्द से भरी यह कहानी एक बार आपको भी हैरान कर देगी

मानसिक रूप से परेशान दो महिलों को किया रेस्क्यू 



CITY LIFE HARYANA |( RAHUL SAHAJWANI ) यमुनानगर : कोरोना काल का दंश झेल रही दो महिलाओं की दर्द से भरी यह कहानी एक बार आपको भी हैरान कर देगी। कोरोना काल मे इधर से उधर जा रहे प्रवासी मजदूरों की तरह परिवार से दूर हुई और धीरे धीरे इनकी मानसिक स्तिथि भी खराब हो गयी । जिसके चलते ये यमुनानगर में सड़क किनारे दर दर की ठोकरें खा रही थी। लेकिन आज दोनों की जिंदगी को एक नई दिशा मिली है।


 कहते है कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नही होता । ऐसी ही एक मिसाल पेश करते हुए मानसिक रूप से परेशान दो महिलाओं को समाज सेविका और बालकुंज की इंचार्ज ने भिवानी की एक संस्था और कलानोर पुलिस की मदद से दोनो को रेस्क्यू कर समाज को एक नई दिशा देने का काम किया है।




तस्वीरों में सड़क पर घूम रही इन दोनों महिलाओं की दयनीय हालत और लाचारी के पीछे की कहानी जब आप सुनेंगे तो आप भी अपनी आंखों से आंसुओ को रोक नही पाएंगे। सड़को पर इधर - उधर घूमती यह दोनों महिलाएं मानसिक रूप से परेशान है । कड़कड़ाती ठंड में ना तो इनके पास रहने के लिए कोई आशियाना है और ना ही कुछ खाने को । लेकिन कहते है कोई प्रयास छोटा नही होता , ऐसा ही एक प्रयास समाज सेविका मोना चौहान ने किया । 




बालकुंज छछरौली की इंचार्ज मोना चौहान ने बताया कि उन्हें करीब 2 महीने पहले एक सूचना प्राप्त हुई थी कि गांव बहरामपुर और कलानौर के पास दो मानसिक रोगी महिलाएं है जो इधर-उधर घूमती हैं।  जिन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए हमने अपनी टीम के साथ जगह-जगह रेकी की जिसके बाद एक महिला हमें बहरामपुर गांव में और दूसरी महिला कलानौर में मिली । दोनों की स्थिति बहुत ज्यादा दयनीय थी। मौके पर जाकर देखा तो यह पाया की सड़क के किनारे छिपकर महिलाएं बैठी हुई थी और उनके शरीर पर कपड़े नहीं थे जब इन से बात की गई तो पता चला कि इनको खाने को भी नहीं मिलता । कभी खाना कोई दे देता है तो कभी नहीं ।




दोनों महिलाएं पूरी तरीके से मानसिक रोगी हैं जिसके चलते एक कोशिश की ताकि यह भी अपनी ज़िन्दगी को अच्छे से जी सके ओर फिर (अपना घर ) एक होम संस्था है जो मानसिक रोगियों के इलाज करती है और उनके स्वस्थ होने के बाद उनके घर तक पहुंचाया जाता है । उनसे संपर्क किया गया और आज अपना घर भिवानी की टीम यहां पर आई । टीम के द्वारा दोनों महिलाओं को गांव से रेस्क्यू किया गया । उसके बाद जो दूसरी महिला थी उसके पास जाना भी बहुत मुश्किल था उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि वह कई महीनों से नहाई नहीं है। उनके पास खड़ा होने को भी कोई तैयार नहीं था लोग दूर दूर भाग रहे थे । आज इन महिलाओं को रेस्क्यू करवाने में हमारा पुलिस चौकी कलानौर पुलिस ने काफी मदद की है। स्थानीय स्तर पर जाकर और दोनों महिलाओं के रेस्क्यू करवाया । भिवानी की टीम का योगदान भी बेहद सराहनीय है।


वही इस मामले में कलानोर चौंकी इंचार्ज ने बताया कि इनमें से एक महिला बिहार की रहने वाली है जो लॉक डाउन के दौरान यहां रह गई थी और बाद में उसकी स्थिति दयनीय हो गई। उसके साथ एक छोटी बच्ची थी जिसे 6 महीने पहले रेस्क्यू कर बालकुंज भेजा गया और दूसरी एक महिला जो पहले ठीक थी लेकिन बाद में पागल हो गयी थी और यहाँ सड़कों पर भटक रही थी। गांव वालों ने इसकी सूचना दी थी जिसके बाद आज बालकुंज इंचार्ज मोना चौहान और भिवानी की संस्था के संयुक्त प्रयास से आज इन्हें रेस्क्यू कर उनका मेडिकल करवा के उन्हें अपना घर भिवानी भेजा गया है।


ऐसे ही अगर समाज मे सब मदद के लिए आगे आये तो शायद इस तरह के मामलों में कुछ कमी जरूर आएगी ।

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