24 घण्टे में
भुगतान का दावा हुआ खोखला साबित
City
Life Haryana।यमुनानगर: इनैलो प्रदेश प्रवक्ता अर्जुन सुढैल ने अनाज
मंडी में पहुँच कर आढतीओ ओर किसानो से मिलकर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार के किसान
के खाते में सीधी पेमेंट के फ़सले से किसान ओर आड़ती दोनो नाखुश है। जब किसान अपनी
गेहूं की पेमेंट आड़ती के माध्यम से लेना चाहते हैं तो सरकार अपने फ़ैसले
ज़बरदस्ती किसानों पर थोपने का काम कर रही है। सरकार के इस फँसले से नाखुश आड़ती
हड़ताल पर चले गये। जिससे किसानो को अपनी फसल बेचने में भारी परेशानी हो गयी।
अर्जुन सुढैल ने
कहा कि मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर अनपढ़ किसान के लिए रजिस्ट्रशन करवाना ही एक
मुश्किल कार्य है, अगर किसान ने
जैसे-तैसे रजिस्ट्रेशन करवा भी लिया तो पोर्टल से सन्देश भेजना तो सरकार की
जिम्मेवारी है। पोर्टल सम्बन्धी सारी व्यवस्था सरकारी है, डिजिटल हरियाणा का दावा करने वाली गठबंधन सरकार में इंटरनेट
की स्पीड कम हो या इंटरनेट की रेंज न हो तो कंप्यूटर कार्य कैसे करेगा। प्रदेश
प्रवक्ता ने कहा कि दावे बड़े बड़े जरूर किय्य जाते हैं, धरातल पर व्यवस्था जीरो ही रहती है।
दावा तो सरकार का
यह भी है कि किसान की फसल का एक-एक दाना 48
घण्टे में खरीद किया जाएगा और अगले 24
घण्टे में किसान के खाते में भुगतान आ जाएगा,
भुगतान न आने की सूरत में 9%
वार्षिक दर से रकम ब्याज सहित दी जाएगी, लेकिन
जमीनी तथ्य कुछ ओर ही है। जबकि गेहूं की ख़रीद शुरू हुए 8
दिन बीत जाने के बावजूद एक भी किसान की पेमेंट खाते में नही
आयी।
अर्जुन सुढैल ने
कहा कि मौजूदा सरकार की नीतियां भी दोगली है। एक देश एक बाज़ार का दावा करने वाली
सरकार राजस्थान से आने वाली फसल को बॉर्डर पर रोकने की सरेआम घोषणा कैसे कर सकती
है यह विचारणीय तथ्य है। दावा तो एक एक दाना खरीदने का हरबार किया जाता है, लेकिन
किसान को रुला रुला कर उसकी फसल का दाना दाना जरूर कर दिया जस्ता है। पिछली बार भी
महीनों तक किसान की फसल का भुगतान तक नही हुआ था।
सरकार डिजिटल
इंडिया का दावा करती है तो फिर किसान का बैंक खाता फसल के भुगतान क्यों नही जोड़
दिया जाता। इधर फसल की खरीद हो उधर मिनटों सेकंडों में उसके खाते में रकम आ जाए।
लेकिन सरकार की नीयत और नीति में अंतर है,
किसान को परेशान करना शायद इनकी पहली नीति है। समय रहते यदि सरकार ने किसान की
समस्याओं का हल ना हुआ तो आने वाले समय मे इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा।